उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले की सदर विधानसभा सीट (127) की वोटर लिस्ट में सामने आई गड़बड़ी को निर्वाचन आयोग ने बेहद गंभीरता से लिया है। मतदाताओं के पहचान पत्र यानी इपिक नंबर पर किसी और का विवरण दर्ज होने की शिकायतों के बाद कराई गई जांच में बड़ी लापरवाही सामने आई है। इस मामले में आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए पीलीभीत के मौजूदा जिला निर्वाचन अधिकारी और उनसे पहले तैनात रहे पूर्ववर्ती अधिकारी से लिखित जवाब-तलब किया है।
जांच में खुली पोल
मामले की शुरुआती पड़ताल में सामने आया कि 31 मई 2026 से लेकर 29 अगस्त 2026 के बीच बड़े पैमाने पर गलत डाटा दर्ज किया गया। इस दौरान कुल 13,779 फॉर्म गलत तरीके से भरे गए थे। हैरानी की बात यह रही कि इनमें से 10,470 ऐसे फॉर्म बिना सही जांच-पड़ताल के मंजूर भी कर लिए गए। जब लोगों ने अपने पहचान पत्र पर दूसरों का ब्योरा देखा, तो यह मामला खुलकर सामने आया।
अधिकारियों की तय होगी जिम्मेदारी
निर्वाचन नियमों के मुताबिक मतदाता सूची को पूरी तरह सही रखना जिले के चुनाव अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। लोक प्रतिनिधित्व कानून और चुनाव आयोग के नियमों के तहत तय कर्तव्यों में चूक पाए जाने पर दोनों शीर्ष अधिकारियों से पूछा गया है कि इतनी बड़ी संख्या में गलत फॉर्म किस स्तर पर स्वीकृत हुए। प्रशासन का कहना है कि जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
सुधार का काम शुरू
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वोटरों के अधिकारों की सुरक्षा और सूची की पारदर्शिता सबसे अहम है। जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में त्रुटियां आई हैं, उन्हें दुरुस्त करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जाएगी ताकि किसी भी नागरिक को मतदान प्रक्रिया में परेशानी न उठानी पड़े। आयोग ने साफ संदेश दिया है कि नियमों की अनदेखी पर जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
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