देहरादून, 27 अक्टूबर। उत्तराखंड विधानसभा के दो दिवसीय सत्र की शुरुआत से ठीक पहले खानपुर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने अपनी सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। उन्होंने अपने इस फैसले के पीछे हरिद्वार क्षेत्र में किसानों की फसल बर्बाद होने के मामले को उठाया है। उमेश कुमार का कहना है कि किसानों को भारी नुकसान हुआ, लेकिन इस गंभीर मुद्दे पर विपक्ष की ओर से उन्हें जरूरी सहयोग नहीं मिला। इसी उपेक्षा से क्षुब्ध होकर उन्होंने विधायक पद छोड़ने का निर्णय सार्वजनिक किया है।

​किसानों के नुकसान पर उपेक्षा का आरोप

उमेश कुमार ने अपने बयान में कहा कि हरिद्वार जिले में किसानों की फसलों को बड़ा नुकसान पहुंचा था। इस समस्या को लेकर वे लगातार आवाज उठा रहे थे, लेकिन विपक्ष का कोई भी नेता या दल उनके समर्थन में खड़ा नहीं हुआ। उनका तर्क है कि जब किसानों और जनता से जुड़े बुनियादी सवालों पर ही जनप्रतिनिधि को समर्थन नहीं मिलता, तो फिर सदन में विधायक बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इसी नाराजगी को उन्होंने अपने इस्तीफे के ऐलान का मुख्य आधार बताया।

​कांग्रेस और भाजपा दोनों से दूरी


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इस्तीफे की घोषणा के साथ ही निर्दलीय विधायक ने राज्य के दोनों प्रमुख सियासी दलों से स्पष्ट दूरी बनाने का संकेत दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह न तो कांग्रेस में जा रहे हैं और न ही भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का उनका कोई इरादा है। उमेश कुमार ने कहा कि वह ऐसे नेताओं के समर्थन में खड़े नहीं हो सकते या उनके नारे नहीं लगा सकते, जो पहले समर्थन मांगने के लिए उनके दरवाजे तक आते थे। उनके इस वक्तव्य से साफ है कि वे किसी दल के साथ नहीं जुड़ रहे हैं।

​सत्र से ठीक पहले सियासी हलचल

विधानसभा का दो दिवसीय सत्र शुरू होने से ठीक पहले आए इस बयान को राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। सत्र के दौरान सरकार के सामने विपक्ष के विभिन्न सवालों और जनसमस्याओं का सामना करने की तैयारी है। ऐसे मौके पर एक निर्दलीय विधायक द्वारा किसानों के सवाल पर विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाना सदन के भीतर विपक्षी रणनीति और एकजुटता को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।

​औपचारिक प्रक्रिया पर टिकी निगाहें

खानपुर विधायक उमेश कुमार ने फिलहाल सार्वजनिक मंच से विधानसभा की सदस्यता छोड़ने की घोषणा की है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में अब नजर इस बात पर टिकी है कि वह विधानसभा अध्यक्ष को अपना औपचारिक त्यागपत्र कब सौंपते हैं। इसके साथ ही क्षेत्र की जनता और राजनीतिक विश्लेषक यह भी देख रहे हैं कि आने वाले दिनों में वह अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर क्या कदम उठाते हैं।

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