नई दिल्ली, 27 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने राज्य में चुनावी ड्यूटी से सीधे जुड़े उन सभी अधिकारियों को हटाने के निर्देश जारी किए हैं, जो लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थापित हैं या अपने गृह जिले में सेवाएं दे रहे हैं। चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के उद्देश्य से यह नीतिगत निर्णय लिया गया है।

​तबादला नीति के कड़े मानक होंगे लागू

​चुनाव आयोग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक ऐसे अफसरों को चुनावी जिम्मेदारी वाले पदों से स्थानांतरित किया जाएगा, जिन्होंने पिछले चार वर्षों के दौरान किसी एक जिले में लगातार तीन वर्ष पूरे कर लिए हैं। इसके साथ ही जिन अधिकारियों की वर्तमान तैनाती उनके अपने गृह जिले में है, उन्हें भी चुनाव से जुड़े पदों पर नहीं रखा जाएगा। आयोग का मानना है कि लंबे समय तक एक ही जगह पदस्थ रहने या गृह क्षेत्र होने से स्थानीय प्रभाव की आशंका बनी रहती है।

तय मानकों के आधार पर दूसरे जिलों में होगा ट्रांसफर


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​यह स्थानांतरण नीति केवल शीर्ष प्रशासनिक पदों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर चुनावी तंत्र का संचालन करने वाले तंत्र पर भी प्रभावी होगी। जारी निर्देशों के तहत जिला निर्वाचन अधिकारी, उपजिलाधिकारी यानी एसडीएम, तहसीलदार और पुलिस विभाग के इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी इस आदेश के दायरे में आएंगे। मतदान प्रक्रिया और कानून व्यवस्था में सीधी भूमिका निभाने वाले सभी अधिकारियों को तय मानकों के आधार पर दूसरे जिलों में भेजा जाएगा।

​कट-ऑफ समयसीमा का निर्धारण

​आयोग ने अधिकारियों के तीन साल के कार्यकाल की गणना के लिए ओ31 मई 2027 की तिथि को आधार माना है। इस निर्धारित अवधि तक जिन अधिकारियों का किसी जिले में तीन साल का सेवाकाल पूरा हो रहा है, उन्हें अनिवार्य रूप से स्थानांतरित किया जाएगा। राज्य सरकार को इस कट-ऑफ समयसीमा के आधार पर सभी संबंधित अधिकारियों की सेवा अवधि की समीक्षा करने और निर्धारित प्रारूप के अनुसार सूची तैयार करने को कहा गया है।

​निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था का लक्ष्य

​विधानसभा चुनाव से पहले प्रशासनिक फेरबदल की यह प्रक्रिया चुनाव तंत्र की विश्वसनीयता मजबूत करने की नियमित और महत्वपूर्ण कवायद है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनावी मशीनरी में जनता और सभी राजनीतिक दलों का भरोसा कायम रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया है कि तबादलों की प्रक्रिया तय समयसीमा के भीतर पूरी कर आयोग को रिपोर्ट सौंपी जाए, ताकि आगामी चरणों में चुनाव की अन्य तैयारियों को गति दी जा सके।

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