रामपुर। बुजुर्ग चाचा-चाची पर फावड़े के बेंट से हमला करने के करीब छह साल पुराने मामले में रामपुर की अदालत ने रंजीत उर्फ भूरा को दोषी ठहराते हुए सात साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश कुलदीप सिंह की अदालत ने दोषी पर विभिन्न धाराओं में जुर्माना भी लगाया है। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) अंजू सिंह ने पैरवी की।

मामले के अनुसार, 11 मार्च 2020 को रंजीत उर्फ भूरा ने अपने बुजुर्ग चाचा रामपाल और चाची इंद्रवती पर फावड़े के बेंट से हमला किया था। हमले में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे। रामपाल के सिर में गंभीर चोट आई थी, जबकि इंद्रवती के हाथ में भी गंभीर चोट लगी थी।

अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी अंजू सिंह ने अदालत के समक्ष चिकित्सीय साक्ष्य, डॉक्टरों की गवाही और वादी के बयान प्रस्तुत किए। अभियोजन के अनुसार, हमले में रामपाल के सिर पर इतनी गंभीर चोट आई थी कि उनकी जान बचाने के लिए सर्जरी करनी पड़ी। बताया गया कि चोट के कारण आज भी उन्हें बोलने और समझने में परेशानी होती है। वहीं, इंद्रवती के हाथ में रॉड डाली गई थी और वह स्थायी शारीरिक परेशानी का सामना कर रही हैं।

सुनवाई के दौरान एडीजीसी अंजू सिंह ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन पक्ष की दलीलें अदालत के सामने रखीं। न्यायाधीश कुलदीप सिंह ने मामले की परिस्थितियों और प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार करते हुए आरोपी को दोषी ठहराया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, अदालत ने इस बात को गंभीर माना कि दोषी ने अपने ही बुजुर्ग चाचा-चाची पर हमला किया था। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए सजा सुनाई।


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न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 308 के तहत रंजीत उर्फ भूरा को सात साल सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। धारा 325 के तहत पांच साल सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने का आदेश दिया गया। इसके अलावा धारा 323 और 504 के तहत एक-एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई। अदालत के फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने संतोष व्यक्त करते हुए न्यायपालिका का आभार जताया।

 

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