प्रयागराज, 29 अक्टूबर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। उच्च न्यायालय ने दोनों की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उनकी सजा को निलंबित करने का आदेश दिया है। हालांकि, अदालत ने निचली अदालत द्वारा तय की गई दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग को स्वीकार नहीं किया। यह फैसला जस्टिस समित गोपाल की सिंगल बेंच ने दोनों की क्रिमिनल रिवीजन याचिका पर सुनाया है।

​हाईकोर्ट का अहम फैसला

जस्टिस समित गोपाल की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद यह आदेश जारी किया। आजम खान और अब्दुल्ला आजम ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अपनी याचिका में मुख्य रूप से तीन राहत मांगी थीं, जिनमें दोषसिद्धि पर रोक लगाना, निचली अदालत से मिली सजा को निलंबित करना और अंतरिम जमानत पर रिहाई शामिल थी।

​दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार


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अदालत ने दोनों नेताओं की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए सजा पर निलंबन का लाभ तो दिया, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग पूरी तरह खारिज कर दी। इसका सीधा मतलब यह है कि अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत से राहत दी है, मगर ट्रायल कोर्ट द्वारा ठहराए गए दोषी के दर्जे पर किसी तरह का कानूनी स्थगन नहीं लगाया है।

​फैसला रखा गया था सुरक्षित

यह पूरा कानूनी विवाद अब्दुल्ला आजम खान के पास कथित तौर पर दो अलग-अलग पैन कार्ड होने के आरोप से जुड़ा है। मामले में ट्रायल कोर्ट ने फैसला सुनाया था, जिसके खिलाफ दोनों ने रिवीजन याचिका दाखिल की थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस मामले पर लंबी बहस चली थी और 15 अक्टूबर को दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

​यूनिवर्सिटी से जुड़ी अन्य कार्रवाई

आजम खान से जुड़े अन्य मामलों को लेकर भी जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी रही है। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से संबंधित संपत्तियों पर कार्रवाई की थी। उस दौरान यूनिवर्सिटी से जुड़ी जमीन और इमारतों को कुर्क करने की प्रक्रिया पूरी की गई थी।

​मौजूदा कानूनी स्थिति

फिलहाल दो पैन कार्ड मामले में उच्च न्यायालय के ताजा रुख से दोनों नेताओं को व्यक्तिगत स्तर पर राहत मिल गई है। सजा निलंबित होने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हुआ है, जबकि दोषसिद्धि बरकरार रहने के कारण संबंधित कानूनी प्रक्रियाएं आगे भी जारी रहेंगी।

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