अमेरिका की धरती पर अपने सपनों को सच करने गई एक और भारतीय युवती सनक और हिंसा का शिकार हो गई। मैरीलैंड के सुरक्षित माने जाने वाले मोंटगोमरी काउंटी इलाके में जब पुलिस निकिता गोदिशाला के अपार्टमेंट में दाखिल हुई, तो वहां का मंजर रूह कंपा देने वाला था। 27 साल की प्रतिभावान सॉफ्टवेयर इंजीनियर निकिता का शव खून से लथपथ पड़ा था। जिसे उसने कभी अपना करीबी समझा था, उसी ने विश्वासघात की सारी हदें पार करते हुए निकिता के शरीर पर चाकू से अनगिनत वार किए। यह सिर्फ एक हत्या नहीं है, बल्कि एक उभरते करियर और एक परिवार की उम्मीदों का बेरहम अंत है।
सनक और साजिश का खतरनाक मेल
पुलिस की शुरुआती जांच में जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे किसी डरावनी फिल्म की पटकथा जैसे लगते हैं। मुख्य संदिग्ध अर्जुन शर्मा निकिता का पूर्व प्रेमी बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार निकिता ने हाल ही में अर्जुन से दूरी बना ली थी और वह अपनी जिंदगी में आगे बढ़ना चाहती थी। लेकिन अर्जुन को यह अलगाव मंजूर नहीं था। उसने निकिता की स्वतंत्रता को अपनी हार मान लिया और बदले की आग में जलने लगा। उसने बड़ी ही चालाकी से वारदात को अंजाम दिया और जब तक पुलिस निकिता तक पहुंच पाती, वह कानून की आंखों में धूल झोंककर विमान के जरिए भारत की ओर रवाना हो गया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न्याय की चुनौती
आरोपी अर्जुन शर्मा का भारत भाग जाना इस मामले को और अधिक पेचीदा बना देता है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने उसके खिलाफ फर्स्ट-डिग्री मर्डर का वारंट जारी कर दिया है, लेकिन अब सबसे बड़ी चुनौती उसके प्रत्यर्पण की है। वाशिंगटन डीसी में स्थित भारतीय दूतावास लगातार अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों और निकिता के परिवार के बीच सेतु का काम कर रहा है। इंटरपोल और अंतरराष्ट्रीय कानूनी संधियों के माध्यम से उसे वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। सवाल यह उठता है कि क्या सरहदें पार कर लेने से कोई अपराधी अपने किए की सजा से बच सकता है? भारत और अमेरिका के बीच मौजूदा कानूनी तालमेल अब इस बात की परीक्षा लेगा कि निकिता को न्याय कितनी जल्दी मिलता है।
सुरक्षा और रिश्तों में हिंसा पर गहराते सवाल
निकिता की मौत ने एक बार फिर विदेशों में रह रहे भारतीय मूल के युवाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घर से हजारों मील दूर रह रहे बच्चों के माता-पिता आज इस खबर से सहमे हुए हैं। यह घटना केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि उस 'पजेसिव' मानसिकता का परिणाम है जहां एक पुरुष किसी महिला के 'ना' को बर्दाश्त नहीं कर पाता। निकिता एक आत्मनिर्भर और सफल युवती थी, लेकिन डोमेस्टिक वायलेंस और स्टॉकिंग जैसी कुरीतियों ने उसकी जान ले ली। समाज को अब यह सोचना होगा कि हम अपनी बेटियों को तो उड़ने के पंख दे रहे हैं, लेकिन क्या हम अपने बेटों को हार और गरिमा का पाठ पढ़ा पा रहे हैं? निकिता का जाना केवल एक परिवार की क्षति नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक चेतावनी है।
---समाप्त---