राजधानी दिल्ली का भीड़भाड़ वाला इलाका पहाड़गंज जहां रातें कभी सोती नहीं हैं वहां एक घर के भीतर ऐसा सन्नाटा पसरा था जो किसी बड़े तूफान की आहट दे रहा था। इस घर के दरवाजे बंद थे और खिड़कियों से झांकती रोशनी किसी सामान्य परिवार का अहसास कराती थी लेकिन इस शांति के पीछे एक मासूम की रूह हर पल कत्ल हो रही थी। एक 14 साल की बच्ची अपने ही पिता की नजरों में छिपी उस हैवानियत को महसूस कर रही थी जिसे समाज और रिश्तों की दुहाई देकर अक्सर दबा दिया जाता है। आखिर उस रात ऐसा क्या हुआ कि वह बच्ची अपनी जान की परवाह किए बिना सड़क पर दौड़ पड़ी और उसकी आंखों में जो खौफ था उसने देखने वालों के रोंगटे खड़े कर दिए। वह किसी अजनबी से नहीं बल्कि अपने उस पिता से भाग रही थी जिसे दुनिया रक्षक मानती है।
दरिंदगी की कहानी और मासूम की जुबानी
इस सनसनीखेज मामले की परतें तब खुलीं जब आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली पीड़िता ने अपने मकान मालिक के पास पहुंचकर उन काली रातों का सच उजागर किया। बच्ची ने रोते हुए बताया कि उसका पिता ही उसका सबसे बड़ा दुश्मन बन चुका था। आरोपी पिता ने रिश्तों की मर्यादा को पूरी तरह ताक पर रख दिया था और अपनी ही नाबालिग बेटी को हवस का शिकार बनाना शुरू कर दिया था। यह कोई एक बार की घटना नहीं थी बल्कि आरोपी ने कई बार इस घिनौने कृत्य को अंजाम दिया। बच्ची डर के मारे अब तक चुप थी लेकिन जब बर्दाश्त की सीमा पार हो गई तो उसने अपनी चुप्पी तोड़कर इस अंधेरी सच्चाई को समाज के सामने लाने का फैसला किया। उसकी दास्तां सुनकर इलाके के लोग सन्न रह गए कि कैसे एक पिता इतना गिर सकता है।
पुलिस की रेड और आरोपी का अंजाम
जैसे ही यह मामला पहाड़गंज थाने पहुंचा वहां ड्यूटी पर तैनात अधिकारी भी इस हैवानियत को सुनकर दंग रह गए। बच्ची के बयानों में वह दर्द और दहशत साफ झलक रही थी जिसे उसने पिछले कई दिनों से झेला था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बिना एक पल की देरी किए तुरंत एफआईआर दर्ज की और आरोपी पिता की तलाश में छापेमारी शुरू कर दी। कानून का शिकंजा कसते ही उस कलयुगी पिता को उसके ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया गया जो अब तक शराफत का चोला ओढ़कर समाज के बीच घूम रहा था। पुलिस अब इस मामले में मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों को जुटा रही है ताकि कोर्ट में आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके और मासूम को इंसाफ मिल सके।
---समाप्त---