देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर मासूमों के लिए असुरक्षित साबित हुई है। उत्तर पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा इलाके में एक ऐसी घटना घटी है जिसने न केवल कानून व्यवस्था बल्कि सामाजिक ताने-बाने पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ एक छह साल की नन्हीं बच्ची के साथ तीन नाबालिग लड़कों ने मिलकर दरिंदगी की सारी हदें पार कर दीं। इस घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई दिन बीत जाने के बाद भी बच्ची ठीक से खड़ी होने या चलने की स्थिति में नहीं है। उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति को देखते हुए पूरा इलाका आक्रोशित है।
लालच देकर अंजाम दी गई वारदात
यह हृदयविदारक घटना 18 जनवरी की शाम को घटित हुई थी। आरोपितों ने बच्ची की मासूमियत का फायदा उठाते हुए उसे खाने-पीने की वस्तु का लालच दिया और उसे सुनसान स्थान पर ले गए। बताया जा रहा है कि एक खाली पड़ी दो मंजिला इमारत में बच्ची के साथ इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया गया। अपनी पहचान छिपाने और विरोध को दबाने के लिए आरोपितों ने बच्ची के हाथ बाँध दिए और उसका मुँह दबा दिया ताकि उसकी चीखें बाहर न जा सकें। घटना के बाद आरोपितों ने बच्ची को डराया-धमकाया भी ताकि वह घर पर किसी को कुछ न बता सके।
परिजनों का संघर्ष और खुलासा
जब बच्ची लहूलुहान हालत में घर पहुँची, तो पहले उसने डर के मारे गिरने की बात कही। यहाँ तक कि पड़ोस में रहने वाला एक आरोपित लड़का भी उसी बात को दोहराता रहा ताकि सच छिपा रहे। हालांकि, बच्ची की बिगड़ती हालत और शरीर पर मौजूद गहरे जख्मों को देखकर माँ का कलेजा काँप उठा। कड़ाई से पूछताछ करने पर बच्ची ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई, जिसे सुनकर परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। मेडिकल रिपोर्ट में भी बच्ची के अंगों पर गंभीर चोटों की पुष्टि हुई है और वह असहनीय दर्द से जूझ रही है।
कानूनी कार्रवाई और सामाजिक रोष
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत केस दर्ज किया और जाँच शुरू की। इस मामले में संलिप्त दो किशोरों को पुलिस ने पकड़ लिया है, जिनकी उम्र 10 और 14 वर्ष है। उन्हें बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। हालांकि, घटना का तीसरा मुख्य आरोपित, जिसकी उम्र १४ वर्ष बताई जा रही है, अपने परिवार समेत फरार है। इस घटना के विरोध में स्थानीय निवासियों और विभिन्न संगठनों ने प्रदर्शन कर आरोपियों के लिए कड़ी सजा की माँग की है। पीड़ित परिवार अब अपने ही घर में असुरक्षित महसूस कर रहा है और डर के साये में जीने को मजबूर है।
---समाप्त---