रोजगार की सुनहरी उम्मीदें लेकर सुदूर दक्षिण के शहर चेन्नई पहुंचे बिहार के एक परिवार का अंत इतना भयावह होगा, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। शेखपुरा जिले के पथलाफार गांव का रहने वाला गौरव यादव अपनी पत्नी मोनी कुमारी और महज डेढ़ साल के बेटे गुड्डू के साथ बेहतर भविष्य के सपने संजोकर चेन्नई गया था, लेकिन वहां उसकी मुलाकात मौत के सौदागरों से हो गई। यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब चेन्नई के इंदिरा नगर इलाके में एक बाइक शोरूम के पास खून से सनी एक संदिग्ध बोरी बरामद हुई। पुलिस ने जब उस बोरी को खोला तो उसमें गौरव यादव का क्षत-विक्षत शव पाकर हर कोई दंग रह गया। जांच आगे बढ़ी तो इस तिहरे हत्याकांड की ऐसी परतें खुलीं जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया।

साजिश के जाल में फंसा मासूम परिवार

​इस जघन्य हत्याकांड की पटकथा नालंदा के रहने वाले उपेंद्र यादव ने लिखी थी, जो मृतक की पत्नी के मायके का परिचित था। गौरव पहले से ही चेन्नई में एक कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहा था, लेकिन मकर संक्रांति के बाद 16 जनवरी को वह उपेंद्र के बुलावे पर अपनी पत्नी और बच्चे को भी साथ ले गया। परिजनों का आरोप है कि उपेंद्र ने ही उन्हें काम का झांसा देकर वहां बुलाया था। महज 12 दिन पहले घर से हंसते-खेलते विदा हुआ यह परिवार चेन्नई पहुंचते ही अपनों के बीच से गायब हो गया। जब गौरव का शव बरामद हुआ, तब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले जिसमें दो लोग दोपहिया वाहन पर बोरी ले जाते दिखे। इसी सुराग ने पुलिस को हत्यारों तक पहुँचाया और फिर जो सच सामने आया वह रूह कंपा देने वाला था।

नदी और कचरे के ढेर में अपनों की तलाश

​गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में कबूल किया कि उन्होंने न केवल गौरव बल्कि उसकी पत्नी और मासूम बच्चे को भी बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया है। हत्यारों की निशानदेही पर पुलिस ने मासूम गुड्डू का शव मध्य कैलाश के पास स्थित कूउम नदी से बरामद किया। वहीं गौरव की पत्नी मोनी कुमारी की तलाश पेरूंगुडी डंपिंग यार्ड के विशाल कचरे के ढेर में की जा रही है। हत्यारों ने साक्ष्य मिटाने के लिए शवों को टुकड़ों में काटकर अलग-अलग दिशाओं में फेंक दिया था। बुधवार को जैसे ही गौरव का शव एंबुलेंस से उसके पैतृक गांव पहुंचा, वहां कोहराम मच गया। गांव के हर घर में मातम है और ग्रामीणों में इस दरिंदगी को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

आरोपियों की गिरफ्तारी और पुलिसिया जांच

​चेन्नई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में मुख्य साजिशकर्ता उपेंद्र यादव समेत कुल सात संदिग्धों को हिरासत में लिया है। प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी उपेंद्र का मोनी कुमारी के मायके में काफी आना-जाना था और इसी जान-पहचान का फायदा उठाकर उसने परिवार को जाल में फंसाया। पुलिस अब इस हत्याकांड के पीछे के सटीक मकसद को खंगाल रही है कि आखिर ऐसी क्या दुश्मनी थी या क्या मंशा थी जिसके कारण एक डेढ़ साल के मासूम को भी नहीं बख्शा गया। फिलहाल पुलिस पकड़े गए आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ कर रही है ताकि इस जघन्य वारदात की कड़ियों को पूरी तरह जोड़ा जा सके और दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जा सके।


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