केरल के शांत कहे जाने वाले कोझिकोड जिले से एक ऐसी खबर आई है जिसने आधुनिक समाज के न्याय करने के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गोविंदपुरम के रहने वाले 41 वर्षीय यू. दीपक का शव रविवार सुबह उनके घर में फंदे से लटका हुआ पाया गया। यह दुखद घटना उस समय हुई जब पिछले कुछ दिनों से दीपक का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से प्रसारित हो रहा था। एक निजी बस में सफर के दौरान एक महिला यात्री ने दीपक पर बदसलूकी और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए महज 18 सेकंड का एक वीडियो रिकॉर्ड किया था। इस वीडियो के सार्वजनिक होते ही बिना किसी अदालती कार्यवाही या पुलिस जांच के, डिजिटल दुनिया ने दीपक को अपराधी घोषित कर दिया। लाखों लोगों द्वारा देखे गए उस वीडियो ने दीपक के सामाजिक और मानसिक जीवन को इस कदर झकझोर दिया कि उन्होंने मौत को गले लगाना बेहतर समझा।
परिवार का पक्ष और अनसुनी सच्चाई की टीस
दीपक की मृत्यु के बाद उनके परिजनों का दुख आक्रोश में बदल गया है। परिवार का स्पष्ट कहना है कि एक निजी कंपनी में सेल्स मैनेजर के तौर पर कार्यरत दीपक बेहद शांत स्वभाव के व्यक्ति थे और उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं था। परिजनों के अनुसार, जिस घटना को यौन उत्पीड़न का रंग दिया गया, वह दरअसल बस में अत्यधिक भीड़ के कारण हुआ एक सामान्य शारीरिक स्पर्श मात्र था। वाहन के अचानक हिलने या यात्रियों के दबाव की वजह से हुए स्पर्श को गलत इरादे से जोड़कर पेश किया गया। परिवार का आरोप है कि सोशल मीडिया पर दीपक को जिस तरह से निशाना बनाया गया और सार्वजनिक रूप से उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाई गई, उसने उन्हें गहरे अवसाद में धकेल दिया। आज उनके घर में मातम है और सवाल यह है कि क्या भीड़ का दबाव और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर दी जाने वाली गालियां ही अब न्याय का नया पैमाना बन चुकी हैं।
कॉल-आउट कल्चर और डिजिटल लिंचिंग का बढ़ता खतरा
यह मामला केवल एक व्यक्ति की आत्महत्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस 'कॉल-आउट कल्चर' की भयावहता को दर्शाता है जहां स्मार्टफोन हाथ में आते ही हर व्यक्ति न्यायाधीश बन जाता है। कानूनी विशेषज्ञों और समाजशास्त्रियों ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे 'डिजिटल लिंचिंग' का नाम दिया है। किसी भी आरोप की सत्यता की जांच किए बिना उसे वायरल करना और संबंधित व्यक्ति को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। कोझिकोड पुलिस ने फिलहाल अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया है और सच्चाई का पता लगाने के लिए बस के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। पुलिस इस पहलू की भी बारीकी से जांच कर रही है कि क्या वीडियो वायरल होने के बाद दीपक को किसी अज्ञात व्यक्ति या समूह द्वारा सीधे तौर पर धमकाया गया था। यह घटना चेतावनी है कि जब तक समाज डिजिटल जिम्मेदारी को नहीं समझेगा, तब तक बेगुनाह लोग इसी तरह अदृश्य अदालतों की भेंट चढ़ते रहेंगे।
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