हाल के कुछ वर्षों में वैश्विक राजनीति का परिदृश्य तेजी से बदला है और इस बदलाव के केंद्र में वह युवा पीढ़ी है जिसे दुनिया जेन-जी के नाम से जानती है। इस पीढ़ी ने पारंपरिक राजनीतिक तौर-तरीकों को खारिज करते हुए विरोध का एक ऐसा नया रूप पेश किया है जिसने दुनिया भर की सरकारों की नींव हिला दी है। जब भी व्यवस्था में भ्रष्टाचार, धांधली या तानाशाही रवैया हावी हुआ, युवाओं ने सड़कों से लेकर डिजिटल दुनिया तक मोर्चा संभाल लिया।
श्रीलंका में आर्थिक बदहाली और महंगाई के खिलाफ 'गोटा गो होम'
श्रीलंका में साल 2022 में आए भीषण आर्थिक संकट, बेतहाशा महंगाई और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ युवाओं ने मोर्चा संभाला। पूरे देश में हुए उग्र प्रदर्शनों और राष्ट्रपति भवन पर जनता के कब्जे के बाद भारी जनदबाव पैदा हुआ। नतीजा यह हुआ कि तत्कालीन राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को देश छोड़कर इस्तीफा देना पड़ा।
केन्या में अनुचित टैक्स वृद्धि के खिलाफ युवाओं का डिजिटल प्रहार
केन्या में साल 2024 में सरकार द्वारा लाए गए नए वित्त विधेयक और टैक्स बढ़ोतरी के खिलाफ जेन-जी ने सोशल मीडिया के जरिए अभूतपूर्व लामबंदी की। बिना किसी पारंपरिक नेता के हुए इस डिजिटल आंदोलन ने पूरी सरकार को बैकफुट पर ला दिया। चौतरफा दबाव में आकर सरकार को विवादित कर प्रस्ताव वापस लेने पड़े और पूरी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल करना पड़ा।
बांग्लादेश में आरक्षण के विरोध में खड़ी हुई ऐतिहासिक क्रांति
बांग्लादेश में साल 2024 में सरकारी नौकरियों में भेदभावपूर्ण आरक्षण प्रणाली के खिलाफ छात्रों का विरोध शुरू हुआ। देखते ही देखते यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया और एक जनक्रांति में बदल गया। युवाओं के इस जबरदस्त दबाव के कारण दशकों से सत्ता पर काबिज प्रधानमंत्री शेख हसीना को अपना पद छोड़कर रातों-रात देश से बाहर जाना पड़ा।
नेपाल में भ्रष्टाचार और डिजिटल सेंसरशिप के खिलाफ उठी हुंकार
नेपाल में साल 2025–2026 के दौरान व्यापक भ्रष्टाचार और सरकारी पाबंदियों के खिलाफ युवाओं का गुस्सा फूटा। सोशल मीडिया पर बैन और प्रशासनिक सड़न से नाराज जेन-जी सड़कों पर उतर आई। इस विशाल जन-आंदोलन के सामने सरकार नहीं टिक सकी और सत्ता का पतन हो गया, जिससे देश में नए राजनीतिक समीकरणों का उदय हुआ।
भारत में नीट पेपर लीक के खिलाफ सड़कों पर उतरे लाखों छात्र
भारत में साल 2026 में नीट परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का उग्र प्रदर्शन देखने को मिला। महज 36 दिनों के भीतर सत्ता को झुकना पड़ा, शिक्षा मंत्री को अपना पद छोड़ना पड़ा और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के 47 अधिकारियों को हटा दिया गया। यह घटना दर्शाती है कि जब युवाओं का भविष्य अधर में लटकता है तो वे किसी भी प्रशासनिक दबाव के आगे झुकने से इनकार कर देते हैं।
पाकिस्तान में आर्थिक बदहाली और इंटरनेट सेंसरशिप से भड़कती चिंगारी
पाकिस्तान में भी अब जेन-जी के असंतोष की चिंगारी धीरे-धीरे एक बड़े आंदोलन का रूप ले रही है। महंगाई, रिकॉर्ड बेरोजगारी, राजनीतिक अस्थिरता और सरकार द्वारा इंटरनेट व सोशल मीडिया पर लगाई जा रही बार-बार की पाबंदियों ने युवाओं के सब्र का बांध तोड़ दिया है। अपने भविष्य को अंधकार में देखकर और पड़ोसी देशों में जेन-जी की सफल क्रांतियों से सीख लेकर पाकिस्तान का युवा वर्ग भी अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सड़कों पर संगठित होकर पुरानी व्यवस्था को सीधी चुनौती देने लगा है।
दक्षिण पूर्व एशिया और अफ्रीका के देशों में फैल सकती है यह ज्वाला
भारत के बाद जेन-जी के इस वैश्विक आंदोलन का दायरा अन्य विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में तेजी से फैल सकता है। इंडोनेशिया, फिलीपींस, मोरक्को, पेरू और मेक्सिको जैसे देशों में जहां युवाओं की आबादी अधिक है और वे बेरोजगारी, भ्रष्टाचार तथा आर्थिक असमानता से जूझ रहे हैं, वहां ऐसे आंदोलनों का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इन देशों में युवा सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे के तौर-तरीकों से प्रेरणा ले रहे हैं, जिससे यह विरोध प्रदर्शन जल्द ही लैटिन अमेरिका, मध्य पूर्व और दक्षिण पूर्व एशिया के कई अन्य हिस्सों में नए राजनीतिक बदलावों की वजह बन सकता है।
बिना नेता के डिजिटल क्रांति से सत्ता का तख्तापलट
इन आंदोलनों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनके पीछे किसी पारंपरिक राजनीतिक दल या स्थापित चेहरे का हाथ नहीं होता। जेन-जी का आंदोलन पूरी तरह से विकेंद्रीकृत होता है जहाँ फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते हैं और सूचनाएं सेकेंडों में लाखों लोगों तक पहुंच जाती हैं। जब मुख्यधारा का मीडिया उनके मुद्दों से आंखें मूंद लेता है तो वे खुद अपने मोबाइल फोन को कैमरा और आवाज बनाकर सच्चाई दुनिया के सामने लाते हैं। वे विचारधाराओं के जाल में उलझने के बजाय सीधे जवाबदेही, पारदर्शिता और त्वरित परिणामों की मांग करते हैं। दुनिया भर के ये आंदोलन यह स्पष्ट संदेश देते हैं कि लोकतंत्र में जनता की आवाज ही सर्वोपरि है और अगर युवाओं के अधिकारों से खिलवाड़ किया गया तो वे व्यवस्था की तस्वीर बदलने से कभी पीछे नहीं हटेंगे।
---समाप्त---