देश भर में NEET परीक्षा धांधली को लेकर चल रहा ऐतिहासिक छात्र आंदोलन अपनी अंतिम तार्किक परिणति तक पहुँच गया है। केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा व जितेंद्र सिंह तथा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से सौरभ दास व आशुतोष रांका ने एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस गतिरोध के समाप्त होने की आधिकारिक घोषणा की। इस दौरान सीजेपी की ओर से स्पष्ट किया गया कि सरकार द्वारा उनकी सभी प्रमुख शर्तों को स्वीकार कर लिए जाने के बाद जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन को समाप्त कर दिया गया है।

​सरकार और सीजेपी के प्रतिनिधियों की आपसी बातचीत में आंदोलनकारियों की तीनों प्रमुख मांगों पर पूर्ण सहमति बन गई है। इसके तहत केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। इसके साथ ही नीट पेपर लीक और उससे उपजे मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले मासूम बच्चों के परिवारों को उचित आर्थिक मुआवजा देने का फैसला लिया गया है। वहीं प्रदर्शन के दौरान छात्रों और युवा नेताओं पर दर्ज की गई सभी पुलिस प्राथमिकियों (FIR) को भी पूरी तरह से वापस लेने का आश्वासन दिया गया है।

​इसके अलावा, साझा वार्ता के दौरान देश की शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी सुधार लाने के लिए सीजेपी द्वारा सुझाए गए 5 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी केंद्र सरकार सहमत हो गई है। दोनों पक्षों ने यह स्पष्ट किया है कि भविष्य में परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, सुरक्षित और छात्र-हितैषी बनाने के लिए आगे भी संवाद का यह सिलसिला जारी रहेगा। इस समझौते को देश भर के मेधावी छात्रों और युवा शक्ति की एक बड़ी और ऐतिहासिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।

इसके साथ ही अभिजीत दीपके ने NEET परीक्षा लीक और धांधली के तनाव में आकर आत्महत्या करने वाले सभी बच्चों की याद में एक राष्ट्रव्यापी कैंडल मार्च निकालने की भावुक अपील भी की है। मंच से बोलते हुए उन्होंने कहा कि हमें उन सभी मासूम बच्चों के लिए मोमबत्तियां जलाकर सड़क पर उतरना है, जिनका हत्यारा यह भ्रष्ट प्रशासनिक तंत्र है। उन्होंने कहा कि यह कैंडल मार्च केवल एक श्रद्धांजलि नहीं होगी, बल्कि उन दिवंगत आत्माओं को न्याय दिलाने और इस व्यवस्था को नींद से जगाने के लिए एक कड़ा संदेश होगा।


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