देश भर के छात्रों के एकजुट विरोध, सड़कों पर जारी लगातार प्रदर्शनों और परीक्षा प्रणाली में मचे घमासान के बीच युवा शक्ति की बड़ी जीत हुई है। NEET-UG परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक के गंभीर आरोपों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन के आगे आखिरकार सत्ता के गलियारों को झुकना ही पड़ा। लगातार उठ रही मांग और व्यापक जनदबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को प्रेषित कर दिया है।

इस ऐतिहासिक फैसले की जानकारी स्वयं धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए दी। उन्होंने अपने संदेश में स्वीकार किया कि देश के युवाओं की भावनाएं, उनकी न्यायोचित अपेक्षाएं और राष्ट्र का हित किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने लिखा कि पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम और विरोध प्रदर्शनों से उनका मन अत्यंत व्यथित हुआ है। उनका कहना था कि वह नहीं चाहते कि देश की युवा शक्ति किसी भ्रम या कानूनी पेचीदगियों के कुचक्र में उलझकर अपना कीमती समय और करियर खराब करे। उन्होंने यह अंदेशा भी जताया कि जंतर-मंतर और देश भर में बनी इस तनावपूर्ण स्थिति का फायदा राष्ट्रविरोधी ताकतें उठा सकती हैं, इसलिए देश की एकता, शांति और छात्रों के हित में यह त्यागपत्र देना ही सबसे उचित कदम है।
लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी, पेपर लीक और परीक्षा माफिया के बोलबाले को लेकर युवाओं में भारी आक्रोश व्याप्त था। राजधानी दिल्ली से लेकर देश के कोने-कोने तक छात्र संगठन और मेधावी युवा सड़कों पर उतरकर जवाबदेही और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए थे। हालांकि, अपने संदेश में मंत्री ने सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का ब्योरा भी दिया। उन्होंने बताया कि गड़बड़ी सामने आते ही जांच सीबीआई को सौंपी गई थी, परीक्षा रद्द कर दोबारा कराई गई और भविष्य में इसे कंप्यूटर आधारित मोड में कराने का फैसला लिया गया। लेकिन सरकार के ये कदम भी आक्रोशित छात्रों के गुस्से को शांत करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए।
छात्रों और युवा आंदोलनों के विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि यह इस्तीफा शुद्ध रूप से एकजुट छात्र शक्ति और युवाओं के निरंतर संघर्ष का परिणाम है। सरकार द्वारा अपनी पीठ थपथपाने और प्रशासनिक तर्कों के बावजूद जनआक्रोश के सामने जब कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा, तब जाकर यह इस्तीफा सामने आया है। अब देखना यह होगा कि शिक्षा मंत्री के हटने के बाद केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली में बुनियादी सुधार करने और भविष्य में देश के लाखों मेधावी छात्रों के सपनों को सुरक्षित रखने के लिए क्या कड़े व पारदर्शी कदम उठाती है।
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