देश में मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में हुई धांधली और पेपर लीक को लेकर उठे व्यापक विरोध के बाद केंद्र सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा कदम उठाया है। लगातार बढ़ते जनदबाव और छात्रों के उग्र प्रदर्शनों के बीच शिक्षा मंत्रालय की कमान में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है। इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील परिस्थिति में प्रधानमंत्री की सलाह पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को देश के नए शिक्षा मंत्री के रूप में अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब देश भर के युवा और छात्र संगठन परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे थे।
कर्नाटक के धारवाड़ संसदीय क्षेत्र से लगातार पांचवीं बार सांसद चुने गए प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के सबसे अनुभवी और भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते हैं। वर्तमान में वे उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ-साथ नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का पदभार संभाल रहे हैं। इससे पूर्व वे संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री और खान मंत्री जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर चुके हैं। प्रशासनिक कार्यों में उनकी कुशलता और राजनीतिक अनुभव को देखते हुए ही शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें इस संवेदनशील समय में शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने का फैसला किया है। सरकारी सूत्रों और के अनुसार प्रह्लाद जोशी अपने मौजूदा विभागों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का कामकाज भी देखेंगे।
नवनियुक्त शिक्षा मंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश के करोड़ों छात्रों और अभिभावकों के बीच राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली के प्रति दोबारा विश्वास कायम करना होगा। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की साख पर उठे सवालों और प्रशासनिक खामियों को दूर करना उनकी पहली प्राथमिकता मानी जा रही है। इसके साथ ही विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन को पारदर्शी बनाना और छात्रों के आक्रोष को शांत करना भी एक कठिन परीक्षा होगी। शिक्षा जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि प्रह्लाद जोशी का कड़ा प्रशासनिक रुख परीक्षा प्रणाली में जरूरी सुधार लाने और व्यवस्थागत कमियों को दूर करने में मददगार साबित हो सकता है। अब देखना यह होगा कि नया नेतृत्व छात्रों की चिंताओं को दूर करने और देश की शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए क्या ठोस और निर्णायक कदम उठाता है।
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