देश की राजधानी दिल्ली का लक्ष्मी नगर इलाका सोमवार की शाम उस वक्त दहल उठा, जब खून के रिश्तों की गरिमा तार-तार हो गई। मंगल बाजार की तंग गलियों में रहने वाले एक परिवार के तीन सदस्यों की उनके अपने ही खून ने बेरहमी से जान ले ली। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि 5 जनवरी 2026 की वह कड़वी हकीकत है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। 25 साल के यशवीर सिंह ने अपनी 46 वर्षीय मां कविता, 24 वर्षीय बहन मेघना और महज 14 साल के मासूम भाई मुकुल की गला रेतकर हत्या कर दी। इस तिहरे हत्याकांड ने न केवल इलाके में सन्नाटा पसरा दिया है, बल्कि यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर एक हंसता-खेलता परिवार इस खौफनाक अंजाम तक कैसे पहुंचा।

गुनाह की दास्तां और कातिल का कबूलनामा

शाम के करीब पांच बजे जब लोग अपने घरों को लौट रहे थे, तब यशवीर सिंह के कदमों में कोई पछतावा नहीं बल्कि एक अजीब सी खामोशी थी। वह खुद लक्ष्मी नगर थाने पहुंचा और पुलिसकर्मियों के सामने अपनी मां और भाई-बहनों के कत्ल की बात कबूल कर ली। शुरुआत में पुलिस को भी उसकी बातों पर यकीन नहीं हुआ, लेकिन जब पुलिस टीम उसके घर पहुंची तो मंजर रूह कंपा देने वाला था। घर के अंदर तीन लाशें खून से लथपथ पड़ी थीं। यशवीर ने एक धारदार हथियार से बारी-बारी तीनों पर हमला किया था। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि वारदात के समय घर में कोई चीख-पुकार बाहर नहीं पहुंची, जिससे यह अंदेशा जताया जा रहा है कि आरोपी ने बहुत ही सुनियोजित तरीके से इस घटना को अंजाम दिया।

आर्थिक बदहाली ने छीनी सोचने-समझने की शक्ति

पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में जो वजह सामने आई है, वह बेहद चौंकाने वाली और दुखद है। यशवीर ने बताया कि वह लंबे समय से बेरोजगारी और आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। घर की माली हालत इतनी खराब थी कि रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी दूभर हो गया था। पिता की अनुपस्थिति में पूरे घर का बोझ उसके कंधों पर था, लेकिन काम न होने के कारण वह गहरे अवसाद में चला गया था। पड़ोसियों का कहना है कि यह परिवार बहुत ही धार्मिक और सीधा था, जिन्हें अक्सर मंदिर जाते देखा जाता था। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि घर के भीतर तंगी का यह दानव यशवीर को कातिल बना देगा। यह घटना इस कड़वे सच को उजागर करती है कि आर्थिक दबाव किस तरह इंसान की संवेदनाओं को खत्म कर उसे अपनों का ही हत्यारा बना देता है।

बिखरते सामाजिक ताने-बाने और मानसिक स्वास्थ्य का संकट

लक्ष्मी नगर की इस घटना ने समाज के उस हिस्से पर प्रहार किया है जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। बेरोजगारी और बढ़ता मानसिक तनाव आज के युवाओं को हिंसक बना रहा है। यशवीर के पड़ोसियों के मुताबिक, वह पिछले कुछ समय से काफी गुमसुम रहने लगा था। पुलिस अब इस मामले की हर कोण से जांच कर रही है कि क्या सिर्फ पैसा ही इस कत्ल की वजह थी या इसके पीछे कोई गहरा पारिवारिक विवाद भी छिपा है। फॉरेंसिक टीमें सबूत जुटा रही हैं और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। लेकिन सवाल वही बना हुआ है कि क्या एक सभ्य समाज में समस्या का समाधान सिर्फ मौत है? यह मामला सरकारों और सामाजिक संस्थाओं के लिए एक चेतावनी है कि मानसिक स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों पर ध्यान देना अब विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन चुका है।


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