जनपद के ग्राम डिबडिबा स्थित भानु प्रताप पब्लिक स्कूल ने आज अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और आने वाली पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से उत्तराखंड के लोक पर्व हरेला का भव्य आयोजन किया। विद्यालय परिसर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में छात्रों, शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन ने अत्यंत उत्साह तथा हर्षोल्लास के साथ भाग लिया। यह त्योहार न केवल कृषि, समृद्धि और नई फसल के आगमन का प्रतीक है, बल्कि यह मानव जीवन और प्रकृति के बीच के अटूट और पवित्र रिश्ते को भी प्रगाढ़ करता है। भानु प्रताप पब्लिक स्कूल हमेशा से ही शिक्षा के साथ-साथ नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध रहा है, और इस आयोजन ने इसी दूरदर्शिता को धरातल पर उतारने का काम किया है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा दर्शकों का मन
उत्सव की शुरुआत बहुत ही ऊर्जावान और रंगारंग तरीके से हुई, जहां विद्यालय के कक्षा चार, सात और आठ के विद्यार्थियों ने अपनी अद्भुत कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। पारंपरिक और आकर्षक पहाड़ी वेशभूषा में सजे इन नन्हे-मुन्ने और युवा कलाकारों ने कुमाऊँनी और गढ़वाली लोक गीतों की मधुर धुनों पर अत्यंत सुंदर तथा मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किए। छात्रों के शानदार तालमेल, मनमोहक हाव-भाव और मंच पर उनके गजब के आत्मविश्वास ने वहां उपस्थित सभी दर्शकों, शिक्षकों और अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम की सफलता के पीछे विद्यालय के नृत्य शिक्षक अनुराग का अथक परिश्रम और कुशल मार्गदर्शन रहा, जिन्होंने बच्चों को लोक कला की बारीकियों से अवगत कराया। कार्यक्रम का सफल और जीवंत संचालन जीव विज्ञान के सम्मानित पीजीटी शिक्षक श्री पवन तिवारी द्वारा किया गया, जिन्होंने अपनी अनूठी वाकपटुता से पूरे समारोह के दौरान दर्शकों को बांधे रखा।
प्रधानाचार्य का संदेश संग लिया प्रकृति संरक्षण का संकल्प
इस पावन अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य महेश चंद्रा ने उपस्थित जनसमूह और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए हरेला त्योहार के ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि हरेला मात्र एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह प्रकृति की उपासना और जीवन के सातत्य का उत्सव है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आज के आधुनिक युग में जब वैश्विक स्तर पर पर्यावरण असंतुलन की समस्या बढ़ रही है, तब हरेला जैसे त्योहारों की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने छात्रों से अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाने, जल का संरक्षण करने, एकल उपयोग वाले प्लास्टिक का त्याग करने और अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने का आह्वान किया। कार्यक्रम के समापन पर सभी विद्यार्थियों और शिक्षक वर्ग ने मिलकर पर्यावरण की रक्षा करने और एक जिम्मेदार नागरिक की तरह जीने का सामूहिक संकल्प लिया, जिससे यह पूरा आयोजन ज्ञान और चेतना का एक समृद्ध केंद्र बन गया।
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