भारतीय सड़कों पर बिना इंश्योरेंस के दौड़ते वाहनों की समस्या पर नकेल कसने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद अहम और कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष न्यायालय ने नए वाहनों की खरीद के समय अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की अवधि को बढ़ाने के निर्देश जारी किए हैं। इस नए आदेश के लागू होने के बाद अब चार पहिया वाहनों यानी कारों के लिए चार साल और दो पहिया वाहनों यानी बाइक या स्कूटर के लिए छह साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस लेना अनिवार्य हो जाएगा। कोर्ट के इस फैसले का सीधा असर नए वाहन खरीदारों की जेब पर पड़ने वाला है, क्योंकि इससे गाड़ियों की शुरुआती ऑन-रोड कीमत में बढ़ोतरी होना तय है।
देश में सड़क हादसों के बाद अक्सर यह देखा जाता है कि दुर्घटनाग्रस्त वाहन का इंश्योरेंस न होने के कारण पीड़ितों और उनके परिजनों को मुआवजे के लिए वर्षों भटकना पड़ता है। इसी समस्या की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को एक विशेष कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत एक ऐसा डिजिटल सिस्टम विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे यदि कोई बिना वैध इंश्योरेंस वाला वाहन पेट्रोल पंप पर ईंधन भरवाने पहुंचे, तो उसे ईंधन देने से इंकार कर दिया जाए। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वाहन चालक नियमित रूप से अपने इंश्योरेंस का नवीनीकरण कराएं।
इस आदेश का सीधा आर्थिक प्रभाव उन ग्राहकों पर पड़ेगा जो नई कार या बाइक खरीदने की योजना बना रहे हैं। जब भी कोई नया वाहन खरीदा जाता है, तो ग्राहक को एक्स-शोरूम कीमत के साथ रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस का शुल्क देना होता है। थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की समय-सीमा बढ़ने से इसका प्रीमियम भी बढ़ जाएगा, जो सीधे तौर पर अपफ्रंट कॉस्ट यानी शुरुआती ऑन-रोड कीमत को बढ़ा देगा।
उदाहरण के तौर पर यदि आप टाटा टियागो जैसी हैचबैक कार खरीदते हैं, तो वर्तमान में इसके इंश्योरेंस में तीन साल का थर्ड-पार्टी कवरेज शामिल होता है। अब इसे बढ़ाकर चार साल किए जाने से कुल इंश्योरेंस प्रीमियम में बढ़ोतरी होगी। ठीक इसी प्रकार हीरो स्प्लेंडर जैसी लोकप्रिय बाइक के मामले में, जहां अभी पांच साल का कवरेज मिलता है, उसे बढ़ाकर छह साल करने से बाइक की ऑन-रोड कीमत कुछ हजार रुपये महंगी हो जाएगी। कुल मिलाकर अदालत का यह कदम भले ही सुरक्षा और मुआवजे के लिहाज से काफी प्रभावी हो, लेकिन नए वाहन खरीदारों के लिए यह थोड़ा आर्थिक बोझ जरूर बढ़ाएगा।
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