आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिग्गज सोशल मीडिया कंपनी मेटा की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए हैं। केजरीवाल का आरोप है कि भारत में उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट को एक तरह से प्रतिबंधित जैसी स्थिति में डाल दिया गया था।
उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि मेटा की ओर से इस पाबंदी को लेकर न तो कोई स्पष्ट वजह बताई गई और न ही इस समस्या के समाधान के लिए कोई उचित दिशा-निर्देश दिए गए। हालांकि, इस भारी विरोध और सार्वजनिक बयानबाजी के बाद अब उनका इंस्टाग्राम अकाउंट पूरी तरह से बहाल कर दिया गया है।
अरविंद केजरीवाल ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए इस पूरे मुद्दे को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी गहरी नाराजगी जाहिर की। अपनी पोस्ट में उन्होंने मेटा और मेटा इंडिया को सीधे तौर पर टैग करते हुए सवाल किया कि आखिर भारत में उनके अकाउंट की पहुंच को क्यों सीमित किया गया था।
उन्होंने जानकारी दी कि इस समस्या के सामने आने के बाद उन्होंने कंपनी के भारतीय कार्यालय से मौखिक रूप से संपर्क करने और जानकारी जुटाने का प्रयास किया, लेकिन वहां से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके अलावा, आधिकारिक ईमेल भेजने पर भी सिर्फ औपचारिक प्रतिक्रियाएं ही मिलीं और वास्तविक समस्या का कोई समाधान नहीं निकाला गया।
इस पूरे मामले को राजनीतिक मोड़ देते हुए केजरीवाल ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मेटा जैसी बड़ी वैश्विक कंपनियां केंद्र सरकार के राजनीतिक दबाव में आकर काम कर रही हैं। आप संयोजक ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म निष्पक्ष होकर काम नहीं करेंगे, तो आम जनता का इन पर से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा। हालांकि, केजरीवाल ने अपने इन दावों और आरोपों के समर्थन में कोई भी तकनीकी दस्तावेज या आधिकारिक प्रमाण साझा नहीं किया है।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में मेटा एक अन्य हाई-प्रोफाइल मामले को लेकर सुर्खियों में था। कुछ ही दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक फेसबुक पोस्ट पर तकनीकी कारणों से अस्थायी रोक लग गई थी। उस दौरान मेटा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने तुरंत इसे एक तकनीकी त्रुटि करार देते हुए पोस्ट को बहाल किया था और सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी थी। केजरीवाल ने इसी पुरानी घटना का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री के मामले में कंपनी तुरंत एक्शन लेती है और माफी मांगती है, तो विपक्ष के नेताओं के मामले में मेटा इतनी देर तक चुप्पी क्यों साधे रहती है।
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