बॉम्बे हाई कोर्ट ने ई-बीस पेट्रोल विवाद मामले में सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रहे केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मेटा, गूगल, यूट्यूब और एक्स जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वे नितिन गडकरी से संबंधित सभी मानहानिकारक और आपत्तिजनक सामग्री को तुरंत हटाएं।
न्यायमूर्ति आरिफ एस. डॉक्टर की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि पहली नज़र में केंद्रीय मंत्री के दावों में पर्याप्त आधार है और सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति की इस प्रकार खुलेआम आलोचना करना अनुचित है। अदालत के रुख को देखते हुए गूगल और मेटा ने भी आपत्तिजनक सामग्री को अपनी इच्छा से हटाने की सहमति व्यक्त की।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपने खिलाफ चलाए जा रहे दुष्प्रचार के विरोध में इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय सहित विभिन्न सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ ग्यारह करोड़ रुपये के हर्जाने का मानहानि केस दायर किया है। अपनी याचिका में गडकरी ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार की ई-बीस योजना से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, क्योंकि यह नीति पेट्रोलियम मंत्रालय के अंतर्गत आती है न कि उनके सड़क परिवहन मंत्रालय के अधीन। याचिका में बताया गया कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का कार्यक्रम वर्ष दो हजार तीन में शुरू हुआ था और भारत से पहले कई यूरोपीय देशों में ई-बीस और ई-तीस जैसे ईंधन का सफलतापूर्वक उपयोग किया जाता रहा है।
अदालत ने सुनवाई के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया कि किसी भी मुद्दे पर आलोचना एक उचित और संवैधानिक सीमा के भीतर ही होनी चाहिए। पीठ ने यह भी कहा कि यदि सोशल मीडिया कंपनियों से लिखित अनुरोध करने के बाद भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार किए गए डीपफेक वीडियो, मॉर्फ्ड तस्वीरें या मीम्स नहीं हटाए जाते हैं, तो याचिकाकर्ता दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।
इसके साथ ही हाई कोर्ट ने गूगल और मेटा जैसी वैश्विक दिग्गज कंपनियों को सलाह दी है कि वे शिकायतों के त्वरित और प्रभावी समाधान के लिए एक स्थायी प्रणाली विकसित करें ताकि प्रभावित व्यक्तियों को बार-बार अदालत न आना पड़े। इस पूरे मामले में अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद तय की गई है।
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