बीते कुछ समय से देश की सड़कों और पेट्रोल पंपों पर एक खामोश असंतोष पनप रहा था, जो अब सोशल मीडिया पर एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। राजधानी नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर हुए हालिया अनशनों और युवाओं के आंदोलनों के बीच भले ही ईंधन नीति का यह संवेदनशील मुद्दा कुछ समय के लिए पृष्ठभूमि में चला गया था, लेकिन अब यह नए तेवरों के साथ वापस लौट आया है। सोशल मीडिया के अलग-अलग मंचों पर उभरी 'E20 जनता पार्टी' किसी पारंपरिक राजनीतिक दल का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों द्वारा अपने उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा के लिए शुरू किया गया एक अनूठा अभियान है। मीम्स, तंज और तीखे सवालों के जरिए शुरू हुई यह मुहिम अब पेट्रोल पंप के नोजल से लेकर सरकार की उच्चस्तरीय ईंधन नीति तक पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
क्या है E20 जनता पार्टी?
सोशल मीडिया पर साझा की गई विस्तृत पोस्ट्स के अनुसार, E20 जनता पार्टी खुद को आम नागरिकों की ओर से चलाया जा रहा एक कंज्यूमर राइट्स यानी उपभोक्ता अधिकार अभियान बताती है। इस समूह का स्पष्ट मानना है कि देश की फ्यूल पॉलिसी में पूरी पारदर्शिता, सही जानकारी और उपभोक्ताओं की पसंद का सम्मान होना अनिवार्य है। उनका कहना है कि जिस प्रकार बाजार में मिलने वाले अन्य व्यावसायिक या खाद्य उत्पादों को खरीदते समय ग्राहकों को अपनी पसंद चुनने के कई विकल्प मिलते हैं, ठीक वैसे ही पेट्रोल खरीदते समय भी वाहन मालिकों को अपनी पसंद और आवश्यकता के अनुसार ईंधन चुनने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए।
वाहन मालिकों की मुख्य मांगें
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में आम वाहन मालिकों की वे व्यावहारिक चिंताएं हैं जो इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के अनिवार्य इस्तेमाल के बाद से लगातार सामने आ रही हैं। देश भर के अलग-अलग हिस्सों से कार और बाइक चालकों ने शिकायत दर्ज कराई है कि E20 ईंधन के कारण उनके वाहनों के माइलेज में अप्रत्याशित गिरावट आई है। इसके साथ ही लंबे समय तक इस ईंधन के इस्तेमाल से इंजन के पुर्जों में खराबी और मेंटेनेंस का खर्च बढ़ने की आशंकाओं ने लोगों को चिंतित कर दिया है।
इस अभियान का उद्देश्य इथेनॉल ब्लेंडिंग या सरकारी योजनाओं को पूरी तरह बंद कराना नहीं है, बल्कि देश के हर पेट्रोल पंप पर 100% शुद्ध पेट्रोल का विकल्प भी उपलब्ध कराना है। इसके अलावा, इस समूह ने मांग की है कि सरकार और तेल कंपनियां हर प्रकार के फ्यूल की साफ लेबलिंग करें, अलग-अलग फ्यूल ब्लेंड के फायदे और नुकसान से जुड़ा डेटा सार्वजनिक करें तथा माइलेज, इंजन पर असर, प्रदूषण और मेंटेनेंस लागत पर इंडिपेंडेंट रिसर्च कराकर उसकी रिपोर्ट जनता के सामने रखें।
CJP की तर्ज पर सटायर अभियान
डिजिटल मंचों पर इस अभियान के काम करने का अंदाज काफी हद तक पूर्व में चले सटायर यानी व्यंग्यात्मक आंदोलनों जैसा ही प्रतीत होता है। जिस तरह कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने तीखे व्यंग्य और जनभावनाओं को जोड़कर नीट पेपर लीक जैसे मुद्दे पर अपनी बात रखी थी, ठीक उसी तर्ज पर E20 जनता पार्टी भी व्यंग्यात्मक पोस्ट्स के सहारे देश के करोड़ों वाहन मालिकों को एक मंच पर ला रही है। अभिजीत दिपके की पुरानी पोस्ट 'क्या होगा अगर सभी कॉकरोच एक साथ आ जाएं' की तर्ज पर इस ग्रुप ने शेयर किया है कि 'क्या होगा अगर सभी बाइक और कार मालिक एक साथ आ जाएं'। यह सवाल सीधे तौर पर नीति-निर्धारकों के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
4 अगस्त को संसद घेराव का ऐलान
खबर लिखे जाने तक सोशल मीडिया पर इस अभियान को अभूतपूर्व जनसमर्थन हासिल हो चुका है। प्लेटफॉर्म X पर 47k से अधिक लोग और इंस्टाग्राम पर 124k से अधिक नागरिक इस मुहिम से सीधे तौर पर जुड़ चुके हैं। बिना किसी औपचारिक संगठन या भारी-भरकम ढांचे के इतने बड़े पैमाने पर लोगों का जुड़ना यह दर्शाता है कि यह समस्या सीधे आम नागरिक की जेब से जुड़ी है। इस डिजिटल दबाव को जमीनी स्तर पर ले जाने के इरादे से E20 जनता पार्टी ने आगामी चार अगस्त दो हजार छब्बीस को संसद घेराव की आधिकारिक घोषणा भी कर दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस बढ़ते जनदबाव और उपभोक्ताओं की जायज मांगों पर क्या कदम उठाती है।
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