प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मेटा इस समय भारत में एक बड़े कानूनी और प्रशासनिक संकट से जूझ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक फेसबुक पेज से एक महत्वपूर्ण वीडियो को हटाए जाने और इंस्टाग्राम पर चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटीरियल यानी सीएसएएम से जुड़ी सामग्री को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों के सामने आने के बाद भारत सरकार और संसदीय समितियों ने कंपनी के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। इन दोनों मामलों ने देश में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही, कंटेंट मॉडरेशन की नीतियों और उनके एल्गोरिदम के पक्षपात पर नए सिरे से एक गंभीर बहस छेड़ दी है।
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब मेटा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फेसबुक पेज से एक रील को बिना किसी पूर्व चेतावनी के लगभग पांच घंटे के लिए हटा दिया। इस वीडियो में प्रधानमंत्री नीट परीक्षा और पेपर लीक के संवेदनशील मुद्दे पर देश के युवाओं को संबोधित कर रहे थे। मेटा ने बाद में इसे तकनीकी खामी और एल्गोरिथम की गलती बताते हुए वीडियो को बहाल कर दिया और औपचारिक माफी भी मांगी। हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा आईटी मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने कंपनी के इस स्पष्टीकरण को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सरकार का मानना है कि यह मामला केवल एक तकनीकी त्रुटि का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में डिजिटल हस्तक्षेप का संकेत देता है।
इसके साथ ही बीबीसी की एक खोजी रिपोर्ट के बाद इंस्टाग्राम पर सीएसएएम सामग्री के विज्ञापनों का मामला उजागर होने से मेटा की परेशानियां और ज्यादा गहरा गई हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और आईटी मंत्रालय ने इस पर अत्यंत सख्त रुख अपनाते हुए मेटा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आईटी समिति के अध्यक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि कंपनी के स्थानीय अधिकारियों का बयान पर्याप्त नहीं है और मेटा के सीईओ मार्क ज़ुकरबर्ग को इस पूरे घटनाक्रम पर भारत से व्यक्तिगत रूप से माफी मांगनी चाहिए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने मेटा की ग्लोबल पॉलिसी टीम के वरिष्ठ अधिकारियों को दिल्ली तलब किया है। इसके अतिरिक्त, हैदराबाद पुलिस में कंपनी के भारतीय प्रमुख के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। सबसे बड़ी चुनौती मेटा के लिए यह बन रही है कि सरकार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाले 'सेफ हार्बर' कानूनी कवच को हटाने पर विचार कर रही है। यदि यह सुरक्षा वापस ली जाती है, तो मेटा के प्लेटफॉर्म पर पोस्ट की जाने वाली किसी भी गैर-कानूनी या आपत्तिजनक सामग्री के लिए कंपनी को सीधे तौर पर आपराधिक रूप से जिम्मेदार माना जाएगा।
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