मिडिल ईस्ट में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच एक-दूसरे पर हमले करने का सिलसिला दोबारा शुरू हो चुका है। पिछली रात हुए हमलों के बाद अमेरिकी सेना ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम यूनिट ने आधिकारिक तौर पर जानकारी दी है कि अपने कमांडर इन चीफ के सीधे निर्देश पर उन्होंने ईरान पर ये नए हमले शुरू किए हैं। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट में नौवहन की स्वतंत्रता को खतरे में डालने की ईरान की क्षमता को कमजोर करने के लिए की जा रही है। पिछले कुछ समय में इस बेहद अहम अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग में वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक दल के खिलाफ ईरान की तरफ से जो आक्रामक गतिविधियां देखी गई थीं, अमेरिका ने इसे उसी का करारा जवाब बताया है।

​ईरानी पोर्ट शहरों में भारी बमबारी से दहल उठे इलाके

​इस अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान के भीतर से भारी तबाही और धमाकों की खबरें आ रही हैं। ईरानी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी विमानों और मिसाइलों ने ईरान के प्रमुख पोर्ट शहरों को निशाना बनाया है। बंदर अब्बास और सिरिक जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहरों में सिलसिलेवार धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं। अचानक हुए इन हमलों के तुरंत बाद ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम्स को हाई अलर्ट पर एक्टिव कर दिया गया है। जमीनी सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि अकेले बंदर अब्बास शहर में अब तक कम से कम आठ बड़े धमाके हो चुके हैं। इसके अलावा बुशहर और अबू मूसा आइलैंड पर भी अमेरिकी हमलों की भीषण गूंज सुनाई दी है, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। सिरिक के तहरूयी गांव के पास भी तीन और बड़े धमाकों की पुष्टि हुई है, जबकि ईरानशहर में भी स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है।

​चाबहार में ब्लैकआउट और बुनियादी ढांचे को नुकसान


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​अमेरिकी हमलों का सीधा असर ईरान के बुनियादी ढांचे पर भी पड़ता दिख रहा है। ईरानी मीडिया के अनुसार हमलों की जद में आए चाबहार शहर में कई जगहों पर बिजली पूरी तरह गुल हो गई है। इस महत्वपूर्ण तटीय शहर में अमेरिकी बमबारी के बाद आसमान में धुएं का गुबार देखा गया और तुरंत बाद बड़े हिस्से में ब्लैकआउट हो गया। स्थानीय प्रशासन ने शहर में बिजली व्यवस्था को वापस पटरी पर लाने के लिए काम शुरू कर देने का दावा किया है, लेकिन रुक-रुक कर हो रहे धमाकों के बीच राहत कार्य में काफी बाधा आ रही है। इस हमले ने न केवल सैन्य ठिकानों बल्कि ईरान की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले तटीय शहरों की सुरक्षा को भी गंभीर खतरे में डाल दिया है।

​डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख और शांति समझौते का अंत

​इस पूरे सैन्य घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा बयान सामने आया है। राष्ट्रपति ट्रंप इस समय नाटो समिट में हिस्सा लेने के लिए तुर्की की राजधानी अंकारा में मौजूद हैं। वहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने साफ किया कि उन्होंने पहले ही चेतावनी दे दी थी कि अमेरिकी सेना ईरान पर दोबारा हमले करेगी। ट्रंप ने ईरान के साथ हुए पुराने शांति समझौते पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अब उसका अंत हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के साथ किसी भी तरह की डील या बातचीत करने को पूरी तरह समय की बर्बादी करार दिया है। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं के बीच ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि ईरान के साथ स्थिति को पहले की तरह पूर्ण युद्ध में नहीं बदला जाएगा, बल्कि यह सटीक और रणनीतिक कार्रवाई का हिस्सा है।

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