आगामी एक अक्टूबर से बिलासपुर मंडी समिति में धान की सरकारी खरीद का औपचारिक आगाज होने जा रहा है। खरीद सत्र को लेकर मंडी प्रशासन ने अपनी ओर से सभी प्राथमिक तैयारियां पूरी करने का दावा किया है। मंडी सचिव सुमेंदु कौशिक ने व्यवस्थाओं का ब्योरा देते हुए बताया कि इस सीजन में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सामान्य श्रेणी के लिए 2441 रुपये प्रति कुंतल और ग्रेड-ए के लिए 2461 रुपये प्रति कुंतल तय किया गया है। यह नई दरें पिछले वर्ष के समर्थन मूल्य की तुलना में करीब 72 रुपये प्रति कुंतल अधिक हैं। सरकारी मशीनरी का दावा है कि इस बार तौल से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी ताकि किसानों को उनकी उपज का सही और न्यायसंगत मूल्य बिना किसी अड़चन के मिल सके।
बिचौलियों पर अंकुश और मंडी सचिव की अपील
सीजन की शुरुआत के दौरान अक्सर बिचौलियों और निजी व्यापारियों द्वारा किसानों को भ्रमित कर औने-पौने दामों में धान खरीदने की आशंका बनी रहती है। इसी जोखिम को देखते हुए बिलासपुर मंडी समिति ने किसानों को जागरूक करने की मुहिम तेज कर दी है। मंडी सचिव सुमेंदु कौशिक ने क्षेत्र के किसानों से विशेष अपील करते हुए कहा है कि वे किसी भी बिचौलिए या निजी आढ़ती के बहकावे में न आएं। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे अपनी पकी फसल को सीधे बिलासपुर मंडी प्रांगण में स्थित अधिकृत क्रय केंद्रों पर ही लाएं। मंडी परिसर में फसल बेचने से किसानों को सरकार द्वारा घोषित एमएसपी का सीधा लाभ मिलेगा और पूरी धनराशि बिना किसी कटौती के सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी।
पिछले अनुभव और जमीनी अव्यवस्थाओं के सबक
यदि पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो अकेले बिलासपुर तहसील क्षेत्र में सबसे अधिक 37 खरीद केंद्र स्थापित किए गए थे। हालांकि, कागजों पर केंद्रों की पर्याप्त संख्या दर्ज होने के बावजूद हर साल धरातल पर किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अक्सर समय पर टोकन न मिलना, बारदाने यानी बोरों की भारी किल्लत और उठान की सुस्त रफ्तार किसानों का पूरा गणित बिगाड़ देती है। इसके अलावा, मंडी प्रांगण में शेड की कमी के कारण खुले में रखी फसल के खराब होने का डर भी बना रहता है। इस बार भी प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां पूरी होने की बात कही जा रही है, लेकिन कागजी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर हमेशा से किसानों के लिए चिंता का विषय रहा है।
मंडी प्रशासन के सामने साख बचाने की परीक्षा
सीजन की शुरुआत में हर बार बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन तौल में सुस्ती, उठान में देरी और मूलभूत सुविधाओं की कमी जैसी दुश्वारियां किसानों के पसीने छुड़ा देती हैं। ऐसे में इस बार बिलासपुर मंडी प्रशासन के सामने महज खरीद प्रक्रिया शुरू करने का दायित्व ही नहीं है, बल्कि पिछले सीजन की अव्यवस्थाओं और प्रशासनिक कमियों को धरातल पर दुरुस्त करके दिखाने की बड़ी परीक्षा भी है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि मंडी प्रशासन सचिव सुमेंदु कौशिक इस अपील को कितना असरदार बना पाता है और क्या किसान इस बार बिना किसी प्रशासनिक अड़चन, लंबी कतारों और अव्यवस्था के अपनी मेहनत की उपज का वाजिब दाम समय पर हासिल कर पाते हैं।
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