बिलासपुर में शताब्दी वर्ष पुराने भाखड़ा वियर और डैम के पिलर्स में आई गंभीर दरारों तथा पानी के अस्वाभाविक रिसाव को लेकर अब तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। एक तरफ जहां इसे प्रशासनिक लापरवाही, घटिया जीर्णोद्धार और भ्रष्टाचार का नतीजा बताया जा रहा है, वहीं स्थानीय स्तर पर इसे 'कुदरत के प्रकोप' के रूप में भी देखा जा रहा है। आम जनता और ग्रामीणों के बीच यह बात तेजी से फैल रही है कि डैम पर अचानक आया यह संकट किसी सामान्य तकनीकी खराबी का परिणाम नहीं है।
मजारों को हटाने से जोड़ रहे लोग
स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ समय पूर्व क्षेत्र में हाईवे चौड़ीकरण का कार्य चल रहा था। इस विकास कार्य की जद में आ रही दो पुरानी दरगाहों (मजारों) को बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिया गया था। उस समय भी इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में असंतोष और धार्मिक भावनाओं के आहत होने की चर्चा थी। अब जब अचानक डैम का ढांचा चरमरा गया और उसमें गंभीर दरारें उभर आईं, तो लोग इस घटना को उसी से जोड़कर देख रहे हैं।
मलबे को डैम में गिराए जाने का आरोप
चर्चाओं का बाजार इस बात को लेकर भी गर्म है कि मजारों को गिराए जाने के बाद उनका मलबा और अवशेष चुपचाप भाखड़ा डैम या उसके आसपास के जलग्रहण क्षेत्र में डंप कर दिए गए थे। स्थानीय निवासियों का दावा है कि पवित्र स्थलों के मलबे के अनादर और उसे डैम जैसे संवेदनशील ढांचे में डाले जाने के कारण ही यह आपदा आई है। हालांकि, इन दावों और दबी जुबान से की जा रही बातों की पुष्टि प्रशासनिक स्तर पर नहीं की गई है, लेकिन आम जनमानस में यह विषय एक बड़ा कौतुक और बहस का मुद्दा बन गया है।
राजनीतिक और प्रशासनिक चुप्पी
एक तरफ जहां इस रहस्यमयी और लोक-चर्चाओं वाले पहलू ने तूल पकड़ लिया है, वहीं दूसरी तरफ नेता और अधिकारी इस संवेदनशील मुद्दे पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं। प्रशासनिक अमला और सत्तापक्ष के प्रतिनिधि फिलहाल डैम की तकनीकी मरम्मत और जेसीबी से गड्ढे भरने के काम में लीपापोती करने में जुटे हैं। वैज्ञानिक और तकनीकी कारणों के साथ-साथ इन दबी हुई जन-भावनाओं ने इस पूरे घटनाक्रम को एक नया और रहस्यमयी मोड़ दे दिया है, जिसके चलते बिलासपुर की यह दुर्घटना अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
नोट: उत्तराखंड तहलका जनमानस में चल रही इस प्रकार की किसी भी अंधविश्वासी या धार्मिक आस्था से जुड़ी चर्चाओं का समर्थन नहीं करता है। हमारा उद्देश्य केवल क्षेत्र में प्रचलित जन-चर्चाओं को समाचार के रूप में प्रस्तुत करना है।
---समाप्त---