उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस वक्त एक बड़ा मोड़ आ गया जब उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद अपनी ही सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली के खिलाफ सड़क पर उतर आए। गोंडा जिले के परसपुर क्षेत्र में निषाद पार्टी के कार्यकर्ता और स्थानीय बर्तन व्यापारी विनोद साहनी की बेरहमी से की गई हत्या के बाद मंत्री का यह कड़ा रुख सामने आया है। लखनऊ के केजीएमयू अस्पताल में इलाज के दौरान कार्यकर्ता की मौत के बाद से ही क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है।

​सोशल मीडिया पर हुए एक कथित विवाद के बाद दबंगों ने विनोद साहनी को रास्ते में घेरकर लाठी-डंडों से आमरण हमला कर दिया था। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। घटना की सूचना मिलते ही मंत्री संजय निषाद लखनऊ स्थित अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और वहीं पीड़ित परिवार के साथ धरने पर बैठ गए। इस घटना ने सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर के मतभेदों और स्थानीय स्तर पर पुलिस-प्रशासन की शिथिलता को उजागर कर दिया है।

​गोंडा पुलिस की सुस्त कार्रवाई से नाराज होकर कैबिनेट मंत्री ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ गोंडा की सड़कों पर पैदल मार्च निकाला और कलेक्ट्रेट परिसर में जबरदस्त प्रदर्शन किया। उन्होंने स्थानीय पुलिस पर आरोपियों को बचाने और समय पर उचित कार्रवाई न करने का सीधा आरोप लगाया। अपनी ही सरकार में मंत्री पद पर रहते हुए संजय निषाद का इस तरह सड़कों पर उतरना प्रशासनिक महकमे और सत्ता के गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

​प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ा प्रहार करते हुए मंत्री ने पीड़ित परिवार के लिए सुरक्षा, 5 करोड़ रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग उठाई। साथ ही उन्होंने दोषियों के अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई और उन्हें सख्त से सख्त सजा देने की बात कही। बढ़ते राजनीतिक और जन आक्रोश को देखते हुए शासन ने तत्काल कदम उठाते हुए संबंधित थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है और मुख्य आरोपियों की धरपकड़ शुरू कर दी है।


Advertisement

---समाप्त---