कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके द्वारा 15 अगस्त को शुरू किए गए 'स्कूल ठीक करो' अभियान ने महज 24 घंटे के भीतर पूरे देश में प्रचंड जोर पकड़ लिया है। इस जमीनी मुहिम के शुरू होते ही सोशल मीडिया पर सरकारी स्कूलों की बदहाली और कमियों की अनगिनत वीडियो की बाढ़ आ गई है, जिसने शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। आम जनता के इस बढ़ते आक्रोश और सोशल ऑडिट को देख शिक्षा माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।
सोशल मीडिया पर उमड़ा जनता का गुस्सा
CJP प्रमुख की अपील के बाद देश के कोने-कोने से अभिभावकों, युवाओं और स्थानीय नागरिकों ने अपने नजदीकी सरकारी स्कूलों का रुख करना शुरू कर दिया है। एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हजारों की संख्या में वीडियो अपलोड किए जा रहे हैं। इन वीडियो में कहीं स्कूलों की टूटी छतें, कहीं बिना पानी के बदबूदार शौचालय, तो कहीं कक्षाओं में ब्लैकबोर्ड की जगह फटे राजनीतिक बैनर साफ दिखाई दे रहे हैं। जनता अब सीधे तौर पर स्थानीय प्रशासन और नेताओं को टैग कर जवाब मांग रही है।
प्राइवेट स्कूलों की फीस पर कैप लगाने की पुरजोर मांग
इस अभियान के जरिए CJP केवल सरकारी स्कूलों की दुर्दशा पर ही सवाल नहीं उठा रही है, बल्कि उसने निजी शिक्षण संस्थानों की मनमानी के खिलाफ भी बड़ा मोर्चा खोल दिया है। CJP ने सरकार से प्राइवेट स्कूलों की फीस पर कैप लगाने (अधिकतम सीमा तय करने) की पुरजोर मांग की है।
पार्टी का आरोप है कि एक तरफ सरकारी स्कूलों को जानबूझकर बदहाल छोड़ा जा रहा है, ताकि मजबूरन अभिभावकों को अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में भेजना पड़े। वहीं दूसरी तरफ, प्राइवेट स्कूल फीस और अन्य फंड्स के नाम पर आम जनता की जेब पर खुलेआम डकैती डाल रहे हैं। CJP प्रमुख ने साफ कहा कि शिक्षा कोई व्यापार नहीं है, इसलिए सरकार को तुरंत दखल देकर प्राइवेट स्कूलों की फीस की एक निश्चित सीमा तय करनी चाहिए ताकि गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों का शोषण रोका जा सके।
शिक्षा माफियाओं और लापरवाह प्रशासन में हड़कंप
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों को जानबूझकर खस्ताहाल रखने और निजी स्कूलों के धंधे को बढ़ावा देने वाले शिक्षा माफियाओं के बीच इस अभियान से भारी खलबली है। जैसे ही CJP कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने स्कूलों का लाइव 'सोशल ऑडिट' शुरू किया, कई जगहों पर सालों से गायब रहने वाले शिक्षक और अधिकारी आनन-फानन में सफाई देते नजर आए। अभिजीत दीपके ने कई जिला स्तरीय अधिकारियों को फोन पर कड़ी चेतावनी देते हुए साफ कर दिया है कि अगर दो महीने के भीतर बुनियादी सुविधाएं ठीक नहीं हुईं, तो CJP सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करेगी।
जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव की आहट
महाराष्ट्र के हिंगोली से शुरू हुई यह चिंगारी अब राजस्थान, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में भी फैल चुकी है। CJP द्वारा जारी की गई चेकलिस्ट के आधार पर लोग स्कूलों में जाकर पानी, बिजली, बेंच और किताबों की उपलब्धता की जांच कर रहे हैं। इस डिजिटल और जमीनी अभियान ने साफ कर दिया है कि अब ग्रामीण भारत के बच्चे अपनी शिक्षा के हक के लिए चुप बैठने वाले नहीं हैं।
 


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