- सकारात्मक शुरुआत: ट्रंप ने बैठक की शुरुआत में शी जिनपिंग का गर्मजोशी से स्वागत किया, उन्हें "कठिन वार्ताकार" बताया लेकिन साथ ही कहा कि उन्हें "बहुत सफल बैठक" की उम्मीद है। शी जिनपिंग ने भी कहा कि ट्रंप से दोबारा मिलकर अच्छा लगा और दोनों देशों को "साझेदार और दोस्त" होना चाहिए।
- व्यापार युद्धविराम की कोशिश: इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच चल रहे व्यापार युद्ध को समाप्त करने का प्रयास करना था। ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में चीन पर नए टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, जबकि चीन ने भी जवाबी कदम उठाए थे। बातचीत में टैरिफ, निर्यात नियंत्रण और व्यापार असंतुलन जैसे मुद्दे शामिल थे।
- अन्य अहम मुद्दे: व्यापार के अलावा, दोनों नेताओं ने सेमीकंडक्टर प्रतिबंध, यूक्रेन में युद्ध, फेंटेनाइल की तस्करी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे कई रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर भी चर्चा की।
- बुनियादी मतभेद: हालांकि, इस मुलाकात ने संबंधों को सुधारने की उम्मीद जगाई है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बुनियादी मतभेद अभी भी बने हुए हैं। व्यापार युद्ध ने शी जिनपिंग के "आत्मनिर्भर चीन" के एजेंडे को बढ़ावा दिया है, जिससे चीन की ताकत बढ़ी है।
- ताइवान पर टालमटोल: बैठक के दौरान, ताइवान जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सीधा टकराव टालने की कोशिश की गई।
- फेंटेनाइल मुद्दा: फेंटेनाइल तस्करी पर सहयोग एक महत्वपूर्ण बिंदु था, जिस पर चीन ने सहयोग करने पर सहमति जताई।
- आपसी समझ की संभावना: मुलाकात के बाद, ट्रंप ने कहा कि वे एक "शानदार समझ" पर पहुंच सकते हैं, हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि शी जिनपिंग एक "कठिन वार्ताकार" हैं।