नई दिल्ली: देश में सबसे लोकप्रिय भुगतान माध्यम UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के इस्तेमाल को लेकर सोशल मीडिया पर एक खबर काफी तेजी से वायरल हो रही है। खबर है कि ₹2000 से अधिक के UPI लेनदेन पर अब ग्राहकों को टैक्स (GST) देना होगा, जिससे करोड़ों डिजिटल यूज़र्स में चिंता पैदा हो गई थी। दावा ये भी किया जा रहा है कि ये नियम 10 दिसम्बर से लागू भी हो गया है। वित्त मंत्रालय ने अब स्पष्ट रूप से साफ़ कर दिया है कि UPI ट्रांजैक्शन पर किसी भी तरह का टैक्स या GST लगाने का कोई प्रस्ताव है।
ग्राहकों को बड़ी राहत: बैंक-टू-बैंक UPI पूरी तरह मुफ्त
सरकारी सूत्रों ने पुष्टि की है कि बैंक खाते से सीधे किए गए सभी UPI भुगतान, चाहे राशि कितनी भी हो, पूरी तरह से मुफ्त रहेंगे। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "UPI भारत की डिजिटल क्रांति की रीढ़ है, और इसे आम जनता के लिए पूरी तरह मुफ्त बनाए रखने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। ₹2000 से अधिक के लेनदेन पर GST लगाने की खबर पूरी तरह से निराधार और भ्रामक है।"
जानें किस कन्फ्यूजन से शुरू हुई अफवाह?
यह भ्रम मुख्य रूप से इंटरचेंज शुल्क (Interchange Fee) को लेकर शुरू हुआ था, न कि GST को लेकर। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने पिछले दिनों एक सर्कुलर जारी किया था, जिसमें: PPI (प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट) वॉलेट्स के माध्यम से ₹2000 से ऊपर के मर्चेंट पेमेंट्स पर इंटरचेंज शुल्क लगाने की बात कही गई थी। यह शुल्क उपभोक्ता पर नहीं, बल्कि भुगतान प्राप्त करने वाले व्यापारी (Merchant) पर लागू होना था।
याद रखें: यह इंटरचेंज शुल्क भी केवल वॉलेट्स (जैसे कि Paytm Wallet या PhonePe Wallet) से किए गए भुगतान पर लागू होता है। यदि आप सीधे अपने बैंक खाते से UPI के जरिए भुगतान करते हैं, तो कोई शुल्क नहीं लगेगा।
डिजिटल भारत की प्रतिबद्धता
सरकार ने एक बार फिर दोहराया है कि वह देश में डिजिटल भुगतान की गति को धीमा नहीं होने देगी। UPI का उपयोग भारत में वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण बना हुआ है, और इसकी मुफ्त उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।
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