रुद्रपुर, उत्तराखंड। उधमसिंह नगर में पुलिस द्वारा एक अधिवक्ता को हिरासत में लिए जाने के विरोध में स्थानीय बार एसोसिएशन के तत्वावधान में वकीलों ने कार्य बहिष्कार का ऐलान कर दिया है, जिससे न्यायिक कार्यों में गतिरोध उत्पन्न हो गया है। वकीलों की इस हड़ताल से कल, 13 दिसंबर को संपूर्ण भारत में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन पर गंभीर संकट मंडराने लगा है।
पुलिस पर गंभीर आरोप
वकीलों का आरोप है कि पुलिस ने बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल (तफ्तीश) किए असली मयंक शर्मा की जगह अधिवक्ता मयंक शर्मा को हिरासत में लिया। यह मामला यहीं नहीं रुका; अधिवक्ताओं ने पुलिस पर इससे भी कहीं गंभीर कार्रवाई का आरोप लगाया है।
उन्होंने आरोप लगाया है कि हिरासत में लिए गए अधिवक्ता की पत्नी और बच्चे को भी थाने बुलाकर कई घंटों तक डिटेन किया गया, जो कि पुलिस की मनमानी को दर्शाता है। इस कृत्य से खफा वकीलों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ एकजुटता दिखाते हुए विरोध प्रदर्शन किया।
विरोध और मांगें
वकीलों की मुख्य मांग यह है कि उधमसिंह नगर के एसएसपी मणिकांत मिश्रा आज शाम तक स्वयं धरना स्थल पर आकर इस 'कृत्य' और 'अमानवीय' कार्रवाई के लिए खेद व्यक्त करें।
आंदोलन की चेतावनी
वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि एसएसपी आज शाम तक उनकी मांग पूरी नहीं करते हैं, तो:
- कल (13 दिसंबर) से एसएसपी मणिकांत मिश्रा के तबादले की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
- जब तक उनका तबादला नहीं हो जाता, तब तक न्यायिक कार्य का बहिष्कार जारी रहेगा।
धरना स्थल पर अधिवक्ताओं द्वारा एसएसपी के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई।
राष्ट्रीय लोक अदालत पर असर
वकीलों के इस कार्य बहिष्कार से आम जनता के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है, खासकर उन लोगों के लिए जिनके मामले कल होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में निपटाए जाने थे। राष्ट्रीय लोक अदालत में लाखों मामलों के आपसी समझौते से निस्तारण की उम्मीद होती है, लेकिन वकीलों की हड़ताल से यह प्रक्रिया पूरी तरह बाधित हो सकती है, जिससे वादियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ेगा।
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