देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य के नाजुक हिमालयी पर्यावरण की सुरक्षा और प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए 1 दिसंबर, 2025 से बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर ग्रीन सेस लगाने का बड़ा फैसला किया है। यह कदम राज्य के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में उठाया गया है, जिसे "स्वच्छ हवा - स्वस्थ जीवन" के नारे के तहत एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। टैक्स लगाने का उद्देश्य
  • प्रदूषण नियंत्रण: राज्य में बढ़ते वाहन प्रदूषण पर लगाम लगाना, खासकर नैनीताल, मसूरी, और ऋषिकेश जैसे पर्यटन स्थलों पर।
  • राजस्व सृजन: इस सेस से अनुमानित तौर पर सालाना ₹100-150 करोड़ का राजस्व प्राप्त होगा, जिसका उपयोग पर्यावरण संरक्षण और वायु गुणवत्ता सुधार के लिए किया जाएगा।
  • टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा: यह पहल पर्यटकों को जिम्मेदार यात्रा के लिए प्रोत्साहित करेगी, ताकि वे राज्य के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में योगदान दें।
  • हरित बुनियादी ढांचा: ग्रीन सेस के राजस्व का उपयोग हरित बुनियादी ढांचे के विकास और स्मार्ट यातायात प्रबंधन प्रणालियों में किया जाएगा।
कैसे वसूला जाएगा टैक्स
  • स्वचालित प्रणाली: टैक्स वसूली के लिए ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरों का इस्तेमाल किया जाएगा।
  • बॉर्डर पर निगरानी: राज्य की सीमा पर 37 एंट्री पॉइंट पर ये कैमरे लगाए जाएंगे, जो वाहनों के प्रवेश करते ही फास्टैग के जरिए स्वचालित रूप से टैक्स काट लेंगे।
  • पारदर्शिता: यह तकनीक मैन्युअल टोल बूथों की आवश्यकता को खत्म करेगी और वसूली में पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी।
वाहन के अनुसार टैक्स की दरें
  • छोटी कारें/सेडान: ₹80
  • बसें: ₹140
  • छोटे मालवाहक वाहन: ₹250
  • बड़े ट्रक/भारी वाहन: ₹120 से ₹700 (भार और क्षमता के आधार पर)
इन वाहनों को मिलेगी छूट
  • इलेक्ट्रिक वाहन (EVs): इलेक्ट्रिक कारों और दोपहिया वाहनों को छूट दी गई है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।
  • सीएनजी वाहन: कंप्रेस्ड नेचुरल गैस पर चलने वाले वाहनों को भी इस टैक्स से मुक्त रखा गया है।
  • दोपहिया वाहन: सभी दोपहिया वाहनों पर कोई ग्रीन सेस नहीं लगेगा।
  • सरकारी वाहन: सरकार के सभी वाहनों को छूट दी जाएगी।
  • आपत्कालीन वाहन: एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को भी छूट मिलेगी।
  • उत्तराखंड रजिस्टर्ड वाहन: राज्य में रजिस्टर्ड वाहनों पर यह टैक्स लागू नहीं होगा।
24 घंटे के भीतर दोबारा एंट्री पर छूट यदि कोई वाहन 24 घंटे के भीतर राज्य में दोबारा प्रवेश करता है, तो उससे दोबारा ग्रीन सेस नहीं वसूला जाएगा। यह नियम उन पर्यटकों और व्यवसायिक ऑपरेटरों के लिए राहत देगा, जिन्हें अक्सर बॉर्डर के आसपास यात्रा करनी पड़ती है। पर्यटकों के लिए प्रभाव पर्यटकों को अपनी यात्रा का बजट बनाते समय इस अतिरिक्त खर्च को शामिल करना होगा। हालांकि, यह सुनिश्चित करता है कि उनका योगदान सीधे उस प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखने में लगे, जिसका वे आनंद लेने आते हैं। व्यवसायिक ऑपरेटरों को भी लागत को अपने बजट में शामिल करना होगा, लेकिन स्वचालित वसूली से समय की बचत भी होगी।

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