- प्रदूषण नियंत्रण: राज्य में बढ़ते वाहन प्रदूषण पर लगाम लगाना, खासकर नैनीताल, मसूरी, और ऋषिकेश जैसे पर्यटन स्थलों पर।
- राजस्व सृजन: इस सेस से अनुमानित तौर पर सालाना ₹100-150 करोड़ का राजस्व प्राप्त होगा, जिसका उपयोग पर्यावरण संरक्षण और वायु गुणवत्ता सुधार के लिए किया जाएगा।
- टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा: यह पहल पर्यटकों को जिम्मेदार यात्रा के लिए प्रोत्साहित करेगी, ताकि वे राज्य के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में योगदान दें।
- हरित बुनियादी ढांचा: ग्रीन सेस के राजस्व का उपयोग हरित बुनियादी ढांचे के विकास और स्मार्ट यातायात प्रबंधन प्रणालियों में किया जाएगा।
- स्वचालित प्रणाली: टैक्स वसूली के लिए ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरों का इस्तेमाल किया जाएगा।
- बॉर्डर पर निगरानी: राज्य की सीमा पर 37 एंट्री पॉइंट पर ये कैमरे लगाए जाएंगे, जो वाहनों के प्रवेश करते ही फास्टैग के जरिए स्वचालित रूप से टैक्स काट लेंगे।
- पारदर्शिता: यह तकनीक मैन्युअल टोल बूथों की आवश्यकता को खत्म करेगी और वसूली में पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी।
- छोटी कारें/सेडान: ₹80
- बसें: ₹140
- छोटे मालवाहक वाहन: ₹250
- बड़े ट्रक/भारी वाहन: ₹120 से ₹700 (भार और क्षमता के आधार पर)
- इलेक्ट्रिक वाहन (EVs): इलेक्ट्रिक कारों और दोपहिया वाहनों को छूट दी गई है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।
- सीएनजी वाहन: कंप्रेस्ड नेचुरल गैस पर चलने वाले वाहनों को भी इस टैक्स से मुक्त रखा गया है।
- दोपहिया वाहन: सभी दोपहिया वाहनों पर कोई ग्रीन सेस नहीं लगेगा।
- सरकारी वाहन: सरकार के सभी वाहनों को छूट दी जाएगी।
- आपत्कालीन वाहन: एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को भी छूट मिलेगी।
- उत्तराखंड रजिस्टर्ड वाहन: राज्य में रजिस्टर्ड वाहनों पर यह टैक्स लागू नहीं होगा।