- रूस का परीक्षण: ट्रंप का यह आदेश रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा 29 अक्टूबर को एक परमाणु-सक्षम, परमाणु-संचालित पानी के भीतर ड्रोन के सफल परीक्षण की घोषणा के बाद आया है। रूस ने हाल ही में परमाणु-संचालित क्रूज मिसाइल का भी सफल परीक्षण किया था, जिसकी आलोचना ट्रंप ने की थी।
- चीन और रूस की बराबरी: ट्रंप ने अपने 'ट्रुथ सोशल' पोस्ट में लिखा है कि अन्य देशों के परीक्षण कार्यक्रमों के कारण, उन्होंने "डिपार्टमेंट ऑफ वॉर" (रक्षा विभाग) को "समान आधार पर" परमाणु हथियारों का परीक्षण शुरू करने का निर्देश दिया है। हालांकि, परमाणु परीक्षण की जिम्मेदारी ऊर्जा विभाग की होती है, रक्षा विभाग की नहीं।
- बढ़ती प्रतिद्वंद्विता: ट्रंप का यह कदम अमेरिका, रूस और चीन के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता को दर्शाता है, जिसमें परमाणु हथियारों की होड़ फिर से शुरू होने का खतरा है। बातचीत के लिए दबाव: कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम चीन और रूस पर दबाव बनाने का एक तरीका हो सकता है, ताकि उन्हें परमाणु अप्रसार से जुड़ी बातचीत के लिए मजबूर किया जा सके।
- चीन के साथ तनाव: ट्रंप ने शी जिनपिंग के साथ बैठक से ठीक पहले यह घोषणा कर कूटनीतिक तनाव बढ़ा दिया है, जिससे व्यापार पर होने वाली बातचीत पर असर पड़ सकता है।
- हथियारों की होड़: इस फैसले से दुनिया के परमाणु हथियारों की होड़ में तेजी आ सकती है, क्योंकि अमेरिका के बाद अन्य देश भी जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं।
- 33 साल की नीति का अंत: अमेरिका 1992 से परमाणु हथियारों का परीक्षण नहीं कर रहा था, और ट्रंप का यह फैसला दशकों पुरानी नीति को पलट देता है।
- आलोचना: ट्रंप के इस फैसले से दुनिया भर में आलोचना होने की संभावना है, खासकर परमाणु अप्रसार के पैरोकारों की ओर से।