नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में पिछले 17 दिनों से प्रदूषण का कहर जारी है, जिसके कारण लोग जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी के कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार 'गंभीर' श्रेणी में बना हुआ है। इसी संकट को देखते हुए, सरकार ने क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम बारिश) का ट्रायल किया है, जिससे कुछ इलाकों में PM10 के स्तर में एक तिहाई से अधिक की कमी दर्ज की गई है। प्रदूषण की स्थिति दिल्ली में दिवाली के बाद प्रदूषण का स्तर भयावह हो गया है, जिसका मुख्य कारण पराली जलाना, वाहनों का धुआं, निर्माण कार्य और धीमी हवा है।
  • गंभीर श्रेणी में AQI: आरके पुरम में AQI 340, लोधी रोड पर 325, और आईटीओ में 359 दर्ज किया गया, जो 'बेहद खराब' से 'गंभीर' श्रेणी में आते हैं।
  • GRAP लागू: बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए, दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत दूसरे चरण की पाबंदियां लागू की गई हैं, जिसमें पार्किंग शुल्क को दोगुना करना शामिल है।
क्लाउड सीडिंग का ट्रायल और नतीजे प्रदूषण से तत्काल राहत पाने के लिए, सरकार ने IIT कानपुर के सहयोग से कृत्रिम बारिश का प्रयोग किया।
  • PM10 में कमी: क्लाउड सीडिंग के ट्रायल के बाद, मयूर विहार और करोल बाग जैसे क्षेत्रों में PM10 के स्तर में उल्लेखनीय कमी देखी गई, हालांकि यह राहत अल्पकालिक थी।
  • कम नमी की चुनौती: पहले ट्रायल में अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके, क्योंकि हवा में नमी का स्तर कृत्रिम बारिश के लिए पर्याप्त नहीं था। इसके लिए कम से कम 50% नमी की आवश्यकता होती है।
विशेषज्ञों की राय विशेषज्ञों का मानना है कि क्लाउड सीडिंग एक अस्थायी समाधान है और प्रदूषण को जड़ से खत्म करने के लिए नहीं है।
  • अल्पकालिक प्रभाव: आईआईटी कानपुर के एक विशेषज्ञ ने कहा कि क्लाउड सीडिंग बहुत महंगी प्रक्रिया है, और यह प्रदूषण का स्थायी समाधान नहीं हो सकती है।
  • अन्य उपायों पर जोर: प्रदूषण से निपटने के लिए, निर्माण कार्यों पर रोक, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने और पराली जलाने जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान खोजना होगा।
आगे की राह सरकार प्रदूषण से निपटने के लिए अन्य उपायों पर भी काम कर रही है:
  • वाणिज्यिक वाहनों पर रोक: 1 नवंबर, 2025 से गैर-BS6 मानक वाले वाणिज्यिक वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।
  • AI और 24/7 निगरानी: सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए एआई आधारित निगरानी और चौबीसों घंटे प्रदूषण की जांच जैसे उपायों को भी लागू करने की बात कही है।
कुल मिलाकर, दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। क्लाउड सीडिंग जैसे प्रयास तत्काल राहत दे सकते हैं, लेकिन प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए दीर्घकालिक और स्थायी समाधान की आवश्यकता है।

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