प्रदूषण की स्थिति
दिल्ली में दिवाली के बाद प्रदूषण का स्तर भयावह हो गया है, जिसका मुख्य कारण पराली जलाना, वाहनों का धुआं, निर्माण कार्य और धीमी हवा है।
- गंभीर श्रेणी में AQI: आरके पुरम में AQI 340, लोधी रोड पर 325, और आईटीओ में 359 दर्ज किया गया, जो 'बेहद खराब' से 'गंभीर' श्रेणी में आते हैं।
- GRAP लागू: बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए, दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत दूसरे चरण की पाबंदियां लागू की गई हैं, जिसमें पार्किंग शुल्क को दोगुना करना शामिल है।
- PM10 में कमी: क्लाउड सीडिंग के ट्रायल के बाद, मयूर विहार और करोल बाग जैसे क्षेत्रों में PM10 के स्तर में उल्लेखनीय कमी देखी गई, हालांकि यह राहत अल्पकालिक थी।
- कम नमी की चुनौती: पहले ट्रायल में अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके, क्योंकि हवा में नमी का स्तर कृत्रिम बारिश के लिए पर्याप्त नहीं था। इसके लिए कम से कम 50% नमी की आवश्यकता होती है।
- अल्पकालिक प्रभाव: आईआईटी कानपुर के एक विशेषज्ञ ने कहा कि क्लाउड सीडिंग बहुत महंगी प्रक्रिया है, और यह प्रदूषण का स्थायी समाधान नहीं हो सकती है।
- अन्य उपायों पर जोर: प्रदूषण से निपटने के लिए, निर्माण कार्यों पर रोक, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने और पराली जलाने जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान खोजना होगा।
- वाणिज्यिक वाहनों पर रोक: 1 नवंबर, 2025 से गैर-BS6 मानक वाले वाणिज्यिक वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।
- AI और 24/7 निगरानी: सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए एआई आधारित निगरानी और चौबीसों घंटे प्रदूषण की जांच जैसे उपायों को भी लागू करने की बात कही है।