नए नियम का क्या है मकसद?
DHS के अनुसार, इस नियम का मुख्य उद्देश्य "अधिक मजबूत स्क्रीनिंग और वीटिंग" सुनिश्चित करना है। उनका कहना है कि यह अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा की रक्षा करेगा। इस कदम को "कॉमन सेंस मेजर" (समझदारी भरा कदम) के रूप में भी प्रचारित किया जा रहा है।
किन लोगों पर पड़ेगा असर?
नए नियम का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो H-4 वीजा पर हैं। ये वे लोग हैं जो H-1B वीजा धारकों के जीवनसाथी होते हैं और EAD पर काम करते हैं। इसके अलावा, F-1 वीजा पर OPT (Optional Practical Training) वाले छात्रों और ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे लोगों पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। ग्रीन कार्ड की लंबी प्रक्रिया के कारण, भारतीय पेशेवरों को बार-बार अपने वर्क परमिट को नवीनीकृत कराना पड़ता है, जिससे उन पर नए नियम का बोझ और बढ़ जाएगा।
क्या हैं इसके संभावित परिणाम?
रोजगार में अंतर: यदि नवीनीकरण प्रक्रिया में देरी होती है, तो कर्मचारियों को अपनी वर्क परमिट की वैधता समाप्त होने के बाद काम बंद करना पड़ सकता है, जिससे उनकी आय रुक सकती है और उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है।
मानसिक तनाव: यह नियम प्रभावित व्यक्तियों में अनिश्चितता और तनाव बढ़ाएगा, खासकर उन लोगों के लिए जो पहले से ही ग्रीन कार्ड के लिए लंबे इंतजार का सामना कर रहे हैं।
प्रशासनिक बोझ: इस बदलाव से USCIS पर काम का बोझ बढ़ सकता है, जिससे प्रोसेसिंग समय में और देरी हो सकती है, जो पहले से ही धीमी है।
आलोचना: इस कदम की अप्रवासी अधिकार संगठनों और कुछ विशेषज्ञों द्वारा आलोचना हो रही है। उनका कहना है कि यह कानूनी अप्रवासियों के जीवन को और अधिक कठिन बना देगा।
आगे क्या करें?
USCIS ने सलाह दी है कि वर्क परमिट धारक अपने आवेदन को समय से बहुत पहले (180 दिन पहले) दाखिल करें ताकि उनकी नौकरी में कोई बाधा न आए।
यह फैसला ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीतियों को फिर से सख्त करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसका भारतीय समुदाय पर गहरा असर पड़ना तय है। ---समाप्त---ट्रंप प्रशासन ने किया वर्क परमिट का ऑटोमेटिक रिन्युअल खत्म, भारतीयों पर पड़ेगा गहरा असर
Oct 30, 2025
Harvinder Sidhu | उत्तराखण्ड तहलका,
Harvinder Sidhu | उत्तराखण्ड तहलका,
नए नियम का क्या है मकसद?
DHS के अनुसार, इस नियम का मुख्य उद्देश्य "अधिक मजबूत स्क्रीनिंग और वीटिंग" सुनिश्चित करना है। उनका कहना है कि यह अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा की रक्षा करेगा। इस कदम को "कॉमन सेंस मेजर" (समझदारी भरा कदम) के रूप में भी प्रचारित किया जा रहा है।
किन लोगों पर पड़ेगा असर?
नए नियम का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो H-4 वीजा पर हैं। ये वे लोग हैं जो H-1B वीजा धारकों के जीवनसाथी होते हैं और EAD पर काम करते हैं। इसके अलावा, F-1 वीजा पर OPT (Optional Practical Training) वाले छात्रों और ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे लोगों पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। ग्रीन कार्ड की लंबी प्रक्रिया के कारण, भारतीय पेशेवरों को बार-बार अपने वर्क परमिट को नवीनीकृत कराना पड़ता है, जिससे उन पर नए नियम का बोझ और बढ़ जाएगा।
क्या हैं इसके संभावित परिणाम?
रोजगार में अंतर: यदि नवीनीकरण प्रक्रिया में देरी होती है, तो कर्मचारियों को अपनी वर्क परमिट की वैधता समाप्त होने के बाद काम बंद करना पड़ सकता है, जिससे उनकी आय रुक सकती है और उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है।
मानसिक तनाव: यह नियम प्रभावित व्यक्तियों में अनिश्चितता और तनाव बढ़ाएगा, खासकर उन लोगों के लिए जो पहले से ही ग्रीन कार्ड के लिए लंबे इंतजार का सामना कर रहे हैं।
प्रशासनिक बोझ: इस बदलाव से USCIS पर काम का बोझ बढ़ सकता है, जिससे प्रोसेसिंग समय में और देरी हो सकती है, जो पहले से ही धीमी है।
आलोचना: इस कदम की अप्रवासी अधिकार संगठनों और कुछ विशेषज्ञों द्वारा आलोचना हो रही है। उनका कहना है कि यह कानूनी अप्रवासियों के जीवन को और अधिक कठिन बना देगा।
आगे क्या करें?
USCIS ने सलाह दी है कि वर्क परमिट धारक अपने आवेदन को समय से बहुत पहले (180 दिन पहले) दाखिल करें ताकि उनकी नौकरी में कोई बाधा न आए।
यह फैसला ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीतियों को फिर से सख्त करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसका भारतीय समुदाय पर गहरा असर पड़ना तय है। ---समाप्त---