पटना, (Uttarakhand Tehelka)। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे और अंतिम चरण की Voting आज, मंगलवार 11 नवंबर 2025 को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई। इस चरण में मतदाताओं ने लोकतंत्र के प्रति अपनी आस्था दिखाते हुए एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। चुनाव आयोग द्वारा देर शाम जारी किए गए अनंतिम (Provisional) आंकड़ों के अनुसार, दूसरे चरण में कुल 68.79 प्रतिशत Voting दर्ज की गई है। यह आंकड़ा 2015 और 2020 के पिछले विधानसभा चुनावों की तुलना में काफी अधिक है, और बिहार के चुनावी इतिहास में अब तक का सबसे उच्चतम प्रतिशत बताया जा रहा है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल ने बताया कि यह Voting प्रतिशत रात तक अंतिम रिपोर्ट्स आने के बाद और भी बढ़ सकती है। दोनों चरणों (पहले और दूसरे) को मिलाकर बिहार में कुल मतदान का औसत अब 66.90 प्रतिशत के आसपास पहुँच गया है, जो एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है।
सीमांचल की निर्णायक भागीदारी
दूसरे चरण में कुल 20 जिलों की 122 विधानसभा सीटों पर वोटिंग हुई। जिलावार Voting प्रतिशत के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि सीमांचल (Seemanchal) और उत्तरी बिहार के जिलों में मतदाताओं ने सबसे अधिक उत्साह दिखाया। यह क्षेत्र, जो अपने सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के लिए जाना जाता है, इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
सीमांचल ने किया कमाल
सर्वाधिक 76.26% मतदान के साथ किशनगंज राज्य में शीर्ष पर रहा वहीं कटिहार 75.23% रिकॉर्ड हाई के साथ दुसरे, पूर्णिया 73.79% जबरदस्त उछाल के साथ तीसरे, सुपौल 70.69% उच्च के साथ चौथे व पूर्वी चंपारण 69.31% उच्च मतदान के साथ पांचवें स्थान पर रहा।
सीमांचल के तीनों प्रमुख जिले—किशनगंज, कटिहार और पूर्णिया में 73% से अधिक Voting दर्ज की गई, जिससे यह क्षेत्र दोनों प्रमुख गठबंधनों, NDA और महागठबंधन, के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण बन गया है। इस क्षेत्र की उच्च Voting राजनीतिक पार्टियों के प्रति जनता की गहरी रुचि और सरकार बदलने या बरकरार रखने की प्रबल इच्छा को दर्शाता है
मगध क्षेत्र में उदासीनता
वहीं, मगध और शाहाबाद के कुछ हिस्सों में मतदाताओं की भागीदारी राज्य के औसत से कम रही। नवादा और रोहतास में कम मतदान, जो क्रमशः 57.11% और 60.69% रहा, दर्शाता है कि इन जिलों में या तो चुनावी मुकाबला कम आकर्षक था, या फिर मतदाता किसी स्पष्ट ध्रुवीकरण की कमी के कारण बूथों तक कम पहुँचे।
Voting प्रतिशत का व्यापक परिदृश्य (अन्य प्रमुख जिले)
रैंक के हिसाब से पश्चिमी चंपारण 69.02% छठे, बांका 68.91% के साथ सातवें, गया 67.50% मतदान के साथ दसवें, औरंगाबाद 64.48% पोलिंग के साथ चौदवें व जहानाबाद 64.36% मतदान के साथ पन्द्र्वें स्थान पर रहा।महिलाओं की रिकॉर्ड-तोड़ भागीदारी
पिछली बार की तरह, इस चरण की Voting में भी महिला मतदाताओं ने पुरुषों की तुलना में अधिक उत्साह दिखाया है। अनौपचारिक रिपोर्टों के अनुसार, महिला मतदाताओं का प्रतिशत 69% से अधिक रहा, जबकि पुरुष मतदाताओं का प्रतिशत लगभग 61% के आसपास रहा। यह स्पष्ट है कि बिहार की महिलाएँ जो नीतीश कुमार की सामाजिक योजनाओं की पारंपरिक लाभार्थी मानी जाती रही हैं। इस चुनाव में एक निर्णायक वोट बैंक के रूप में उभरी हैं। उनकी यह भागीदारी यह तय करेगी कि क्या वे वर्तमान गठबंधन को जारी रखना चाहती हैं या नए नेतृत्व को मौका देना चाहती हैं।
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रिकॉर्ड मतदान के राजनीतिक निहितार्थ
रिकॉर्ड-तोड़ Voting प्रतिशत अक्सर यह संकेत देती है कि मतदाताओं में बदलाव की या मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखने की एक मजबूत इच्छा है। चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में युवा और नए मतदाताओं का बाहर आना सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) या फिर किसी विशेष मुद्दे पर मजबूत ध्रुवीकरण का परिणाम हो सकता है।
अब, सभी 243 सीटों पर चुनावी प्रक्रिया संपन्न हो चुकी है। सभी उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है। बिहार की जनता के इस रिकॉर्ड-तोड़ फैसले का परिणाम 14 नवंबर 2025 को घोषित किया जाएगा, जब पता चलेगा कि महागठबंधन और 'डबल इंजन' की लड़ाई में किसकी जीत हुई।