ढाका (Uttarakhand Tehelka)भारत और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के बाद अब बांग्लादेश की राजधानी ढाका में भी Bomb Blast की घटनाओं ने पूरे देश को दहला दिया है। सोमवार को ढाका के अलग-अलग हिस्सों में एक के बाद एक 11 स्थानों पर देसी बम फेंके गए और तीन बसों में आग लगा दी गई। गनीमत यह रही कि इन सुनियोजित हमलों में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन इन घटनाओं ने ढाका समेत पूरे बांग्लादेश में भय और राजनीतिक अस्थिरता का माहौल पैदा कर दिया है, जिससे देश की अंतरिम सरकार पर दबाव बढ़ गया है।

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​सिलसिलेवार हमले और लक्षित स्थान पर Bomb Blast

​ढाका पुलिस के अनुसार, ये Bomb Blast हमले सोमवार सुबह शुरू हुए और देर रात तक जारी रहे, जो हमलावरों के व्यापक नेटवर्क और सुनियोजित रणनीति का संकेत देते हैं। हमलावरों ने सार्वजनिक परिवहन से लेकर धार्मिक प्रतिष्ठानों, यहां तक कि प्रमुख राजनीतिक हस्तियों से जुड़े संस्थानों को भी निशाना बनाया। पहला विस्फोट सुबह लगभग 3:45 बजे मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस से जुड़े संस्थान, ग्रामीण बैंक मुख्यालय के सामने हुआ। इसके कुछ ही घंटों बाद, मत्स्य पालन एवं पशुधन सलाहकार फरीदा अख्तर के स्वामित्व वाले व्यवसायिक प्रतिष्ठान प्रबर्ताना पर भी देसी बम फेंके गए।

​दिन के दौरान, हमलावरों ने महत्वपूर्ण और भीड़-भाड़ वाले स्थानों को निशाना बनाया, जिनमें इब्न सिना अस्पताल, मिडास सेंटर, मौचक चौराहा, अगरगांव में बांग्लादेश बेतार के सामने, खिलगांव फ्लाईओवर और मीरपुर में शाह अली मार्केट शामिल हैं। देर शाम, बांग्ला मोटर स्थित नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) कार्यालय पर देसी बम फेंका गया, जिसमें एक राहगीर मामूली रूप से घायल हो गया। बसों में आगजनी की घटनाएँ भी हुईं, जिनमें शाहजादपुर, मेरुल बड्डा और धानमंडी स्थित लैब एड अस्पताल के सामने खड़ी बसें शामिल थीं। Bomb Blast से स्पष्ट है कि हमलावर एक व्यापक दहशत फैलाना चाहते थे।


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​Dhaka Blast: 13 नवंबर के फैसले और 'लॉकडाउन' से जुड़ा षड्यंत्र?

​इन हमलों ने देश की अंतरिम सरकार और विपक्षी दलों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है, जो सीधे-सीधे 13 नवंबर की तारीख से जुड़ी है। इसी दिन अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ एक मामले में अपना फैसला सुनाने वाला है। Bomb Blast के बाद पुलिस मुख्यालय ने भी इसी तारीख से पहले ढाका के सभी थानों को गश्त और निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया है।

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​कई राजनीतिक विश्लेषक और विपक्षी दल आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि इन Bomb Blast का मकसद शेख हसीना की पार्टी द्वारा घोषित संभावित ढाका लॉकडाउन (बंद/हड़ताल) जैसे आगामी राजनीतिक आंदोलनों को विफल करना तो नहीं? सुरक्षा एजेंसियों की भारी तैनाती और जनता में दहशत का माहौल पैदा करके, हमलावर आगामी राजनीतिक आंदोलनों में लोगों की भागीदारी को कम करने की कोशिश कर सकते हैं। ये हमले अंतरिम सरकार की कानून-व्यवस्था बनाए रखने की क्षमता पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न लगाते हैं, जिससे देश में राजनीतिक अस्थिरता चरम पर पहुँच गई है।

​क्षेत्रीय तुलना और संभावित समूह

​बांग्लादेश में हुए ये हमले क्षेत्रीय बांग्लादेश वायलेंस के पैटर्न को दर्शाते हैं। ये घटनाएँ हाल ही में भारत में दिल्ली के लाल किले के पास और पाकिस्तान में इस्लामाबाद में सुप्रीम कोर्ट के बाहर हुए विस्फोटों की याद दिलाती हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से यह चिंता का विषय है कि पड़ोसी देशों में एक साथ राजनीतिक रूप से संवेदनशील स्थानों को निशाना बनाया जा रहा है।

​जांच एजेंसियां विभिन्न संभावित समूहों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। इन हमलों के पीछे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हो सकते हैं, जो 13 नवंबर के फैसले से पहले अराजकता फैलाना चाहते हैं, या फिर अतिवादी तत्व, जो मौजूदा अंतरिम सरकार की अस्थिरता का फायदा उठाना चाहते हैं। मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के कार्यालय ने इन हमलों की निंदा की है और धार्मिक सह-अस्तित्व को बाधित करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जो धार्मिक प्रतिष्ठानों के पास हुए हमलों की ओर इशारा करती है।

​त्वरित कार्रवाई और सुरक्षा अलर्ट

​हमलों की गंभीरता को देखते हुए, ढाका पुलिस और रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) ने तुरंत सुरक्षा अलर्ट जारी किया। एनसीपी कार्यालय पर हमले के बाद कुल पाँच संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वे न केवल इन हमलों के पीछे के मास्टरमाइंड का पता लगाएं, बल्कि देश में शांति और व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित करें, ताकि राजनीतिक अस्थिरता को कम किया जा सके और राष्ट्र निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।

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