इस्लामाबाद (Uttarakhand Tehelka)। पाकिस्तान द्वारा खुद के फैलाए Terrorism की आग में एक बार फिर निर्दोष अवाम की बलि चढ़ी है। मंगलवार, 11 नवंबर 2025 को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दिन के व्यस्त समय में एक बड़ी त्रासदी उस समय घटित हुई, जब व्यस्त G-11 सेक्टर में जिला और सत्र न्यायालय परिसर के बाहर एक विनाशकारी आत्मघाती विस्फोट हुआ। यह घटना देश की उस पुरानी नीति की भयावह परिणति है, जिसके तहत Terrorism को पालने और उसे अपनी रणनीतिक गहराई के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की गई थी।
इस विस्फोट में, आधिकारिक अपडेट के अनुसार, 12 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 24 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। यह हमला इस्लामाबाद के न्यायिक और प्रशासनिक केंद्र के ठीक बगल में हुआ। इंडिया टुडे ने पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से इस घातक हमले की खबर दी है।

घरेलू आग और दोष मढ़ने का पुराना खेल
जहां एक ओर इस्लामाबाद Terrorism के साए में है, वहीं पाकिस्तानी सेना का मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) एक बार फिर अपनी दोहरी नीति उजागर कर रहा है। ISPR ने दक्षिणी वज़ीरिस्तान के कैडेट कॉलेज वाना पर हुए हमले के लिए, जिसका अभी भी कोई स्पष्ट सूत्रधार नहीं मिला है, भारत समर्थित आतंकवादियों पर आरोप मढ़ दिया है।
- तानाशाहीपूर्ण आरोप: ISPR का यह बयान कि वाना कैडेट कॉलेज पर हमला भारत समर्थित आतंकवादियों ने किया, एक स्थापित पैटर्न को दोहराता है: जब भी पाकिस्तान घरेलू Terrorism को नियंत्रित करने में विफल होता है, वह अपनी विफलता का ठीकरा भारत पर फोड़ने लगता है।
- TTP का इनकार: यह आरोप तब और खोखला साबित होता है, जब तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे समूह, जो अक्सर ऐसे हमलों की जिम्मेदारी लेते हैं, वाना हमले से इनकार कर रहे हैं। पाकिस्तानी सेना अक्सर TTP जैसे समूहों को 'बुरे आतंकवादी' और भारत विरोधी समूहों को 'अच्छे आतंकवादी' के रूप में देखती रही है। अब यही घरेलू Terrorism देश की राजधानी तक पहुँच गया है।
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सुरक्षा एजेंसियों की चुनौतियाँ और पहचान
कोर्ट परिसर में हुए इस्लामाबाद आत्मघाती विस्फोट में मारे गए 12 लोगों में वरिष्ठ वकील अहमद बिलाल, उनके सहायक शौकत अली, और कोर्ट परिसर के बाहर चाय विक्रेता गुलज़ार खान शामिल हैं।
- उच्च अधिकारी का बयान: इस्लामाबाद के आईजी डॉ. अकबर अब्बास ने पुष्टि की है कि यह एक आत्मघाती हमला था और काउंटर-टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) को जांच का जिम्मा सौंपा गया है।
- रक्षा मंत्री का कबूलनामा: रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान Terrorism के खिलाफ प्रभावी रूप से "युद्ध की स्थिति में" है, लेकिन उन्होंने भी अपनी पुरानी गलतियों का जिक्र करने से परहेज किया।
सारांश: दोहरी नीति का अंजाम (Latest Update)
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आज, मंगलवार, 11 नवंबर 2025 को दिन के व्यस्त समय में एक बड़ी त्रासदी उस समय घटित हुई, जब व्यस्त G-11 सेक्टर में जिला और सत्र न्यायालय परिसर के बाहर एक विनाशकारी आत्मघाती विस्फोट हुआ। राजधानी में हुई यह घटना देश की उस पुरानी नीति की भयावह परिणति है, जिसके तहत Terrorism को पालने और उसे अपनी रणनीतिक गहराई के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की गई थी।
इस विस्फोट में, आधिकारिक अपडेट के अनुसार, 12 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 24 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। यह हमला इस्लामाबाद के न्यायिक और प्रशासनिक केंद्र के ठीक बगल में हुआ, जिसने राजधानी के निवासियों में दहशत और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। इंडिया टुडे ने पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से इस घातक हमले की खबर दी है। विस्फोट की आवाज़ पुलिस लाइन मुख्यालय तक सुनी गई, जिससे शहर की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
[video width="480" height="270" mp4="https://uttarakhandtehelka.in/wp-content/uploads/2025/11/ssstwitter.com_1762867820030.mp4"][/video]हालिया Terrorism की लहर: सुरक्षा एजेंसियों की विफलता
इस्लामाबाद आत्मघाती विस्फोट ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तान पहले से ही खैबर पख्तूनख्वा (KP) और बलूचिस्तान में आतंकवादी समूहों की बढ़ती गतिविधि का सामना कर रहा है। पिछले कुछ महीनों में, सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर किए गए कई आत्मघाती हमले देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं। इन हमलों की संख्या और गंभीरता में वृद्धि दर्शाती है कि सुरक्षा व्यवस्था में बड़े पैमाने पर खामियां हैं।
उदाहरण के लिए, पिछले महीने ही KP के डेरा इस्माइल खान में पुलिस चौकी पर हुए एक बड़े हमले और बलूचिस्तान के क्वेटा में सुरक्षा काफिले पर हुए घातक Terrorism के हमलों ने सैकड़ों जानें ली थीं। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे प्रतिबंधित संगठनों द्वारा इन क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने की खबरों के बीच राजधानी में हुआ यह हमला इस बात का प्रमाण है कि Terrorism अब सीमावर्ती इलाक़ों से निकलकर पाकिस्तान के राजनीतिक केंद्र तक पहुंच चुका है। इस्लामाबाद पुलिस और खुफिया तंत्र को इस बात की गहन समीक्षा करनी होगी कि इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद, हमलावर विस्फोटक सामग्री के साथ कोर्ट परिसर के इतने करीब कैसे पहुँच गया।
ISPR का नया प्रोपेगेंडा: खुद की विफलता पर भारत पर आरोप
जहां एक ओर इस्लामाबाद Terrorism के साए में है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तानी सेना का मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) एक बार फिर अपनी दोहरी नीति उजागर कर रहा है। ISPR, जो हाल ही में भारत के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर जैसे नए प्रोपेगेंडा के लिए जाना जाता है, ने दक्षिणी वज़ीरिस्तान के कैडेट कॉलेज वाना पर हुए हमले के लिए, जिसका अभी भी कोई स्पष्ट सूत्रधार नहीं मिला है, भारत समर्थित आतंकवादियों पर आरोप मढ़ दिया है।
- तानाशाहीपूर्ण आरोप: ISPR का यह बयान कि वाना कैडेट कॉलेज पर हमला भारत समर्थित आतंकवादियों ने किया, एक स्थापित पैटर्न को दोहराता है: जब भी पाकिस्तान घरेलू Terrorism को नियंत्रित करने में विफल होता है, वह अपनी विफलता का ठीकरा भारत पर फोड़ने लगता है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी इसी तरह के मनगढ़ंत दावे किए गए थे।
- TTP का इनकार: यह आरोप तब और खोखला साबित होता है, जब तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे समूह, जो अक्सर ऐसे हमलों की जिम्मेदारी लेते हैं, वाना हमले से इनकार कर रहे हैं। पाकिस्तानी सेना अक्सर TTP जैसे समूहों को 'बुरे आतंकवादी' और भारत विरोधी समूहों को 'अच्छे आतंकवादी' के रूप में देखती रही है। आज यही घरेलू Terrorism देश की राजधानी तक पहुँच गया है, जो उसकी नीतिगत भूलों को उजागर करता है।
मृतकों की पहचान और उच्च अधिकारियों के बयान
कोर्ट परिसर में हुए इस्लामाबाद आत्मघाती विस्फोट में मारे गए 12 लोगों में वरिष्ठ वकील अहमद बिलाल, उनके सहायक शौकत अली, और कोर्ट परिसर के बाहर चाय विक्रेता गुलज़ार खान शामिल हैं।
- सरकारी सहायता: प्रधानमंत्री शेहबाज खान ने मृतकों के परिजनों को ₹20 लाख (पाकिस्तानी रुपये) और घायलों को ₹5 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा की है।
- उच्च अधिकारी का बयान: इस्लामाबाद के आईजी डॉ. अकबर अब्बास ने पुष्टि की कि काउंटर-टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) को जांच का जिम्मा सौंपा गया है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान Terrorism के खिलाफ प्रभावी रूप से "युद्ध की स्थिति में" है, लेकिन उन्होंने भी अपनी पुरानी गलतियों का जिक्र करने से परहेज किया।
सारांश: दोहरी नीति का अंजाम
घायलों को PIMS अस्पताल ले जाया गया है, जहां आपातकाल लागू है। घटना के बाद जिम्मेदार लोगों को कानूनी अंजाम तक पहुँचाने के लिए सरकार और अधिकारियों ने प्रतिबद्धता जाहिर की है। पाकिस्तान सरकार का यह कहना कि Terrorism के नवीनतम हिंसक कार्य पाकिस्तान से उग्रवाद के खतरे को समाप्त करने के सरकार के संकल्प को मजबूत करता है, तब तक अर्थहीन है जब तक वह अपनी विदेश और आंतरिक नीति में Terrorism के प्रति दोहरे मापदंड को समाप्त नहीं कर देती। इस्लामाबाद आत्मघाती विस्फोट ने यह साबित कर दिया है कि खुद के पैदा किये Terrorism की आग में आज पाकिस्तान का हर कोना जल रहा है।
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