नई दिल्ली (Uttarakhand Tehelka)। लाल किले के पास हुए सनसनीखेज कार विस्फोट की जाँच कर रही राष्ट्रीय जाँच एजेंसी NIA और उच्च-स्तरीय सरकारी सूत्रों ने प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर मामले में एक बड़ा मोड़ ला दिया है। सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि यह घटना सुनियोजित (Planned) आत्मघाती हमला (Suicide Attack) नहीं थी, जैसा कि शुरुआत में आशंका जताई गई थी, बल्कि यह संदिग्ध आतंकी की घबराहट के कारण हुई एक ऑपरेशनल विफलता थी।

फिदायीन एंगल खारिज: फोरेंसिक सबूत बने निर्णायक
सरकारी सूत्रों ने मंगलवार को जारी बयान में इस आकलन की पुष्टि की कि लाल किले के करीब हुआ कार विस्फोट फिदायीन हमला नहीं था। यह आकलन घटनास्थल पर मौजूद फोरेंसिक (Forensic) और भौतिक सबूतों पर आधारित है।
जाँच एजेंसियों ने इस दावे के समर्थन में दो मुख्य तकनीकी डिटेल्स (Details) पेश किए हैं:
- क्रेटर (Crater) का न होना: विस्फोट स्थल पर आमतौर पर एक शक्तिशाली विस्फोटक से होने वाले ब्लास्ट (Blast) के बाद बनने वाला गहरा गड्ढा (क्रेटर) नहीं मिला।
- प्रोजेक्टाइल (Projectile) का अभाव: मौके से भारी जनहानि के लिए उपयोग किए जाने वाले नुकीले छर्रे या स्प्लिंटर्स (Splinters) बरामद नहीं हुए, जिससे यह सिद्ध होता है कि IED पूरी तरह से तैयार (Prepared) नहीं था या इसका मुख्य उद्देश्य आत्मघाती हमला नहीं था।
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इन टेक्निकल (Technical) साक्ष्यों ने यह स्थापित किया है कि विस्फोटक का प्रभाव कार के भीतर ही सीमित रहा, जिससे बड़े पैमाने पर जनहानि टल गई।
विस्फोट का कारण: 'संदेह और घबराहट'
NIA सूत्रों के अनुसार, विस्फोट की मुख्य वजह संदिग्ध आतंकी डॉ. उमर उ नबी द्वारा समय से पहले विस्फोटक उपकरण (IED) को ट्रिगर करना था। देश भर में सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ती सक्रियता (Activity) और संभावित गिरफ्तारी (Arrest) के डर से, जम्मू-कश्मीर के पुलवामा निवासी इस संदिग्ध ने हड़बड़ी में यह कदम उठाया।
यह घटना सुनियोजित बड़े हमले की तुलना में जल्दबाजी (Haste) में की गई एक कार्रवाई की ओर अधिक इशारा करती है।
संदिग्ध की स्थिति: डॉ. उमर उ नबी की मौत की पुष्टि
जाँच एजेंसियों के सूत्रों ने अब डॉ. उमर उ नबी की स्थिति की भी पुष्टि (Confirmation) कर दी है। विस्फोट के दौरान कार के भीतर मौजूद नबी की मौके पर ही मौत हो गई थी। फोरेंसिक टीम ने डीएनए साक्ष्यों के आधार पर उसकी पहचान स्थापित की है।

NIA जाँच का फोकस: नेटवर्क और फंडिंग
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी NIA को सौंप दी है। एजेंसी ने UAPA (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम (Explosive Substances Act) की संबंधित धाराओं के तहत केस रजिस्टर (Register) कर लिया है।
वर्तमान में जाँच का मुख्य फोकस (Focus) आतंकी नेटवर्क के विस्तार, फाइनेंसिंग (Financing) रूट और साजिशकर्ताओं की पहचान पर है। प्रारंभिक जाँच में इस घटना के तार फरीदाबाद में हाल ही में पकड़े गए आतंकी मॉड्यूल से जुड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। NIA की टीमें अब दोनों घटनाओं के बीच के कनेक्शन (Connection) को खंगाल रही हैं ताकि इस पूरी साजिश का पर्दाफाश (Unmasking) किया जा सके।
प्रारंभिक रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दिल्ली में हुआ धमाका एक टैक्टिकल (Tactical) चूक थी, न कि सफल फिदायीन ऑपरेशन। NIA अब इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुँचने की तैयारी में है।
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