देहरादून । ​उत्तराखंड में मतदाता सूचियों (Voter Lists) को पूरी तरह से शुद्ध और त्रुटि रहित बनाने के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision - SIR) यानी 'विशेष गहन पुनरीक्षण' का काम जल्द ही गति पकड़ने वाला है। भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India - ECI) के निर्देश पर, प्रदेश में इसकी प्रारंभिक तैयारियां (Pre-SIR Activities) जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं। यह अभियान आगामी चुनावों के लिए एक मजबूत और विश्वसनीय मतदाता आधार तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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​SIR का प्राथमिक उद्देश्य

​SIR का प्राथमिक लक्ष्य मतदाता सूची (Voter Lists) से अपात्र मतदाताओं के नामों को हटाना और सभी पात्र नागरिकों को सूची में शामिल करना है। इस अभियान के तहत मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाता है:

  1. दोहरी प्रविष्टियाँ हटाना: सुनिश्चित करना कि एक ही व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग स्थानों पर दर्ज न हो।
  2. मृत/स्थानांतरित मतदाता: उन मतदाताओं के नाम हटाना, जिनका निधन हो चुका है या जो स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर चले गए हैं।
  3. नए पात्र मतदाताओं को जोड़ना: 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवाओं को सूची में शामिल करना।
  4. त्रुटियों का सुधार: नाम, पता, आयु या अन्य विवरणों में हुई गलतियों को ठीक करना।

​SIR से पहले की तैयारी: 2003 की सूची से मिलान

​उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के निर्देशों के अनुसार, प्रदेश में SIR से पहले की प्री-एसआईआर गतिविधियाँ शुरू हो गई हैं। यह चरण विशेष रूप से मतदाताओं की पहचान और सत्यापन पर केंद्रित है, जिसका लक्ष्य सूची में मौजूद विसंगतियों को दूर करना है।


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​इस प्रक्रिया में, वर्तमान मतदाता सूची (Voter Lists) का मिलान वर्ष 2003 की मतदाता सूची से किया जा रहा है। बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को प्रतिदिन कम से कम 30 मतदाताओं के घरों तक पहुंचने और उनकी मैपिंग (सत्यापन) करने का निर्देश दिया गया है। 40 वर्ष से अधिक आयु के उन मतदाताओं की विशेष रूप से पहचान की जा रही है, जिनके नाम 2003 की सूची में नहीं थे। ऐसे मामलों में, बीएलओ माता-पिता या दादा-दादी के नाम के आधार पर उनकी मैपिंग कर रहे हैं।

​उत्तराखंड के लिए विशेष चुनौतियाँ

​पहाड़ी राज्य होने के कारण उत्तराखंड में SIR अभियान कुछ विशेष चुनौतियों का सामना कर सकता है। पलायन (Migration) एक बड़ी समस्या है, जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर गए मतदाताओं के नामों का सत्यापन करना और उन्हें उचित श्रेणी में रखना चुनौतीपूर्ण होगा। इसके अलावा, भारत-नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों में नागरिकता और निवास से जुड़े दस्तावेज की गहन जाँच करना एक संवेदनशील कार्य होगा, ताकि अवैध प्रवासियों को सूची से बाहर रखा जा सके। निर्वाचन आयोग इन चुनौतियों से निपटने के लिए विशेष योजनाएं तैयार कर रहा है।

​SIR की संभावित प्रक्रिया

​SIR अभियान के दौरान, बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर गणना प्रपत्र (Enumeration Forms - EFs) वितरित किए जाते हैं और भरे हुए प्रपत्र एकत्र किए जाते हैं। उम्मीद है कि दिसंबर 2025 के मध्य तक संशोधित मतदाता सूची (Voter Lists) का मसौदा (ड्राफ्ट रोल) जारी किया जा सकता है। इसके प्रकाशन के बाद, नागरिकों को नाम जोड़ने, हटाने या सुधार के लिए दावे और आपत्तियाँ दाखिल करने का अवसर मिलेगा, जिसके लिए आमतौर पर लगभग एक महीने का समय दिया जाता है। सभी दावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद, फरवरी 2026 तक अंतिम मतदाता सूची जारी होने की संभावना है।

​नागरिकों के लिए संदेश: सक्रिय भागीदारी क्यों आवश्यक है?

​मतदाता सूची (Voter Lists) की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए आम जनता की सक्रिय भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। नागरिकों को चाहिए कि वे अपने बीएलओ को सही जानकारी प्रदान करें और निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:

  • दो स्थानों पर पंजीकरण न कराएँ: यदि आपका नाम दो अलग-अलग जगहों की सूची में है, तो एक जगह से नाम हटवाने के लिए आवश्यक फॉर्म भरकर अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।
  • दस्तावेज तैयार रखें: अपने पहचान और पते के दस्तावेज बीएलओ को सत्यापन के लिए उपलब्ध कराएँ।
  • जागरूक रहें: अपने परिवार के सभी पात्र सदस्यों के नाम सूची में हैं या नहीं, इसकी जाँच करें।

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