नई दिल्ली। ​रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दो दिवसीय राजकीय यात्रा, जो भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हुई, सफलतापूर्वक समाप्त हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रोटोकॉल तोड़कर व्यक्तिगत रूप से पुतिन का स्वागत करना और उसके बाद हुई शिखर वार्ता, इस बात का स्पष्ट संकेत है कि नई दिल्ली अपने पुराने और भरोसेमंद दोस्त के साथ रिश्तों को किसी भी बाहरी दबाव में कमजोर नहीं होने देगी।

shubh

​विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर द्वारा पुतिन को एयरपोर्ट पर विदा करने के साथ ही, यह दौरा कई मायनों में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और रूस की वैश्विक स्थिति को मजबूत करने वाला साबित हुआ है।

​जानें कितना सफल रहा पुतिन का ये दौरा

​पुतिन का यह दौरा व्यावहारिक और सांकेतिक दोनों स्तरों पर अत्यंत सफल रहा।


Advertisement
  • व्यावहारिक सफलता: द्विपक्षीय व्यापार को अगले पाँच वर्षों में 70 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। ऊर्जा, मोबिलिटी, शिपिंग, खाद्य सुरक्षा और उर्वरक जैसे प्रमुख क्षेत्रों में 19 से 21 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। रूसी कच्चे तेल की खरीद पर व्यापार घाटे को संतुलित करने के लिए भारत ने मैन्युफैक्चरिंग पार्टनरशिप और रूस में कुशल भारतीय श्रमिकों की कमी को पूरा करने पर जोर दिया है।
  • सांकेतिक सफलता: पीएम मोदी ने पुतिन की जमकर तारीफ करते हुए दोनों देशों की दोस्ती को "ध्रुव तारे की तरह स्थिर" बताया, जो वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद अटल है। यह गर्मजोशी भरा स्वागत दुनिया को एक स्पष्ट संदेश देता है कि भारत अपनी विदेश नीति के निर्णय अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर लेता है।

​पुतिन के इस दौरे का दुनिया पर क्या होगा असर

​पुतिन के भारत दौरे का असर वैश्विक भू-राजनीति में तीन प्रमुख संदेशों के रूप में देखा जा रहा है:

  1. बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की पुष्टि: यह दौरा पश्चिमी देशों (विशेष रूप से अमेरिका) के उस प्रयास को चुनौती देता है, जिसमें वे रूस को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करना चाहते हैं। भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह एक ऐसी बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का पक्षधर है, जो किसी एक देश के दबाव से मुक्त हो और सहयोग व सम्मान पर आधारित हो।
  2. भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता: इस यात्रा ने भारत की विदेश नीति की रणनीतिक स्वायत्तता पर मुहर लगा दी है। भारत ने दर्शाया कि वह अमेरिका के साथ अपने संबंधों को मजबूत करते हुए भी, रूस के साथ अपने ऐतिहासिक और सामरिक संबंधों को बनाए रखने में सक्षम है। यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत की एक संतुलित शक्ति के रूप में भूमिका को स्थापित करता है।
  3. रक्षा और ऊर्जा बाजार पर असर: रूस, भारत को तेल की आपूर्ति जारी रखने और रक्षा सौदों में लगातार सहयोग करने का आश्वासन दे रहा है। यह रूस के लिए पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच एक स्थिर बड़ा बाजार सुनिश्चित करता है, जबकि भारत के लिए रियायती कीमतों पर तेल और महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों की आपूर्ति सुनिश्चित होती है।

​पुतिन के इस दौरे पर अमेरिका की प्रतिक्रिया

​पुतिन की भारत यात्रा ऐसे समय में हुई है जब रूसी तेल खरीद के कारण अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर भारी टैरिफ (50% तक) लगा रखा है। अमेरिका ने इस दौरे पर सीधी आलोचना से बचते हुए संतुलित प्रतिक्रिया दी है।

  • तनाव और चेतावनी: अमेरिकी विश्लेषकों ने इस यात्रा को वॉशिंगटन और दिल्ली के बीच बढ़ते तनाव के रूप में देखा है। अमेरिका ने भारत को 'क्वाड' (Quad) के माध्यम से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की "गुहार" लगाई है, ताकि हिंद महासागर में चीन के प्रभुत्व को रोका जा सके।
  • पुतिन की प्रतिक्रिया: पुतिन ने अमेरिकी टैरिफ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि अमेरिका स्वयं रूस से ईंधन खरीद सकता है, तो भारत को यह अधिकार क्यों नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत-रूस सहयोग किसी तीसरे देश (अमेरिका) के खिलाफ नहीं है।

​कुल मिलाकर, अमेरिका की प्रतिक्रिया भारत को अपने पाले में बनाए रखने की चिंता को दर्शाती है, जबकि भारत ने बाहरी दबाव को दरकिनार कर अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी।

​अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने पुतिन के इस दौरे को कितनी तवज्जो दी

​अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने पुतिन के इस दौरे को उच्च महत्व दिया और इसे भारत की विदेश नीति के लिए एक "निर्णायक क्षण" के रूप में देखा।

  • पश्चिमी मीडिया: न्यूयॉर्क टाइम्स और ब्लूमबर्ग जैसे प्रमुख अमेरिकी मीडिया संस्थानों ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पुतिन के लिए रेड कार्पेट बिछाने को "ट्रम्प के दबाव को बेअसर करने" के रूप में देखा। उन्होंने इस यात्रा को "मोदी-पुतिन के व्यक्तिगत रिश्ते की मजबूती" का प्रतीक बताया।
  • रूस समर्थक और चीन: रूस के सरकारी प्रसारकों ने इसे यूक्रेन युद्ध के बावजूद रूस के अलग-थलग न होने के संदेश के रूप में प्रसारित किया। चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने इसकी जमकर तारीफ करते हुए कहा कि दोनों देशों ने दुनिया को साफ संदेश दिया है कि बाहरी प्रतिबंध और दबाव सफल नहीं होंगे।
  • पड़ोसी देश: पाकिस्तान में इस दौरे से जुड़ी ख़बरों ने चिंता पैदा की, क्योंकि इसे भारत की बढ़ती ताकत और रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी के रूप में देखा गया।

​यह दौरा वैश्विक मीडिया में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की जीत के रूप में छाया रहा, जहाँ भारत ने स्पष्ट कर दिया कि वह किसी भी गुट में बँधने के बजाय अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम रहेगा।

---समाप्त---