लखनऊ, (उत्तराखण्ड तहलका): देश में इस समय 'Vande Mataram' के गायन को लेकर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के एक बयान ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। मदनी के बयान पर भाजपा और कांग्रेस के नेताओं ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं, जिससे यह मुद्दा गरमा गया है।
मौलाना मदनी का विवादास्पद बयान
हाल ही में, मौलाना अरशद मदनी ने 'Vande Mataram' गाने को लेकर एक बयान दिया, जिसे कई राजनीतिक हलकों में विवादास्पद माना जा रहा है। मदनी ने कहा है कि उनका संगठन, जमीयत उलेमा-ए-हिंद, 'Vande Mataram' गाने के लिए तैयार है, लेकिन इसमें एक शर्त है: गाने में 'मां' (Mother) शब्द की जगह 'वतन' (Homeland) शब्द का प्रयोग किया जाना चाहिए।

मौलाना मदनी ने तर्क दिया कि 'Vande Mataram' में 'मां' शब्द का प्रयोग इस्लाम की मान्यताओं के अनुसार उचित नहीं है, क्योंकि इस्लाम में अल्लाह के अलावा किसी और की पूजा या वंदना की अनुमति नहीं है।
भाजपा ने साधा निशाना: 'देशभक्ति पर सवाल'
मौलाना मदनी के इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने तुरंत कड़ी आपत्ति जताई है। भाजपा नेता राकेश त्रिपाठी ने मदनी पर तीखा निशाना साधा।
राकेश त्रिपाठी का बयान: त्रिपाठी ने मौलाना मदनी के बयान को देशभक्ति पर सवाल उठाने वाला करार दिया। उन्होंने कहा कि "Vande Mataram" देश का राष्ट्रीय गीत है और इस पर किसी भी तरह की शर्त लगाना या इसे बदलना देश के सम्मान के खिलाफ है। उन्होंने मदनी पर तुष्टिकरण की राजनीति करने और धार्मिक आधार पर देश को बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत में 'मां' शब्द केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रेम, सम्मान और मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक है। यह भी पढ़ें: Attack on ‘Jai Hind’! Rajya Sabha के कड़े निर्देश से बड़ा Ruckus, मर्यादा और राष्ट्र भक्ति के बीच direct clash!कांग्रेस की प्रतिक्रिया: 'मुद्दों को दबाने की साज़िश'
वहीं, कांग्रेस के नेता और उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने इस पूरे विवाद को मौजूदा सरकार की रणनीति बताया।
अजय राय का बयान: अजय राय ने कहा कि सरकार जानबूझकर ऐसे विवादों को हवा देती है ताकि लोगों का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटक जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि "सरकार का काम हिंदू-मुस्लिम करके महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे अहम मुद्दों को दबाना है।" उन्होंने मौलाना मदनी के बयान पर सीधे टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि देश के सभी नागरिकों को अपने-अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता है, लेकिन राजनीतिक दलों को ऐसे संवेदनशील विषयों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।इस बयानबाजी से स्पष्ट है कि 'Vande Mataram' का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक रस्साकशी का केंद्र बन गया है, जहाँ हर पक्ष अपने एजेंडे के अनुसार बयान दे रहा है।
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