बिहार के रेल मार्गों पर आधुनिकता का प्रतीक मानी जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस एक बार फिर उपद्रवियों के निशाने पर आ गई है। समस्तीपुर और मुजफ्फरपुर रेल खंड के बीच हुई इस ताजा घटना ने रेल प्रशासन की नींद उड़ा दी है। शनिवार को जब जोगबनी से दानापुर जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस दुबहां स्टेशन के करीब से गुजर रही थी तभी अचानक कुछ अज्ञात तत्वों ने ट्रेन को लक्ष्य बनाकर पत्थरबाजी शुरू कर दी। इस हमले में चेयर कार कोच की एक खिड़की का शीशा बुरी तरह चकनाचूर हो गया। गनीमत यह रही कि उस खिड़की के पास बैठे यात्री को कोई गंभीर चोट नहीं आई लेकिन अचानक हुए इस हमले से ट्रेन के भीतर बैठे यात्रियों में अफरातफरी और दहशत का माहौल पैदा हो गया। यह घटना रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है क्योंकि जिस समय यह हमला हुआ उस दौरान पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक और मंडल रेल प्रबंधक स्वयं उसी इलाके के दौरे पर थे।
सुरक्षा घेरे को चुनौती देती उपद्रवी घटनाएं
रेलवे सूत्रों के अनुसार ट्रेन ने जैसे ही समस्तीपुर स्टेशन से प्रस्थान किया था और अपनी निर्धारित गति पकड़ी थी तभी दुबहां के पास यह अप्रिय घटना घटी। हमले के तुरंत बाद आरपीएफ और जीआरपी की टीमों को सतर्क किया गया। दानापुर स्टेशन पहुंचने पर तकनीकी टीम ने तत्काल क्षतिग्रस्त शीशे का मुआयना किया और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए उसे दुरुस्त करने की प्रक्रिया शुरू की। रेलवे पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया है और आसपास के इलाकों में संदिग्धों की तलाश तेज कर दी गई है। यह बिहार में महज तीन दिनों के भीतर वंदे भारत पर हुआ दूसरा हमला है जो यह दर्शाता है कि असामाजिक तत्वों के मन में कानून और राष्ट्रीय संपत्ति के प्रति सम्मान का अभाव होता जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए केवल बल प्रयोग काफी नहीं है बल्कि स्थानीय स्तर पर लोगों को जागरूक करने की भी आवश्यकता है।
राष्ट्रीय संपत्ति के संरक्षण की सामूहिक जिम्मेदारी
वंदे भारत जैसी सेमी-हाई स्पीड ट्रेनों को भारतीय रेल के भविष्य के रूप में देखा जा रहा है। इन ट्रेनों में इस्तेमाल होने वाली तकनीक और सामग्री अत्यंत कीमती होती है। बार-बार होने वाले इन हमलों से न केवल सरकारी खजाने पर बोझ पड़ता है बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि भी प्रभावित होती है। रेलवे ने एक बार फिर जनता से भावुक अपील की है कि वे रेल को अपनी संपत्ति समझें और उसे नुकसान पहुंचाने वालों की सूचना पुलिस को दें। किसी भी ट्रेन पर पत्थर फेंकना एक दंडनीय अपराध है जिसमें जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है। प्रशासन अब संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाने और पटरियों के आसपास रहने वाली आबादी के बीच जागरूकता अभियान चलाने की योजना बना रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
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