देश के अलग-अलग हिस्सों में महापुरुषों की जयंती और पवित्र धार्मिक महीनों के दौरान शांति व्यवस्था को भंग करने के प्रयास देखे गए हैं। कर्नाटक, मध्य प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों से आई खबरें बताती हैं कि किस तरह मामूली विवाद ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया। बागलकोट में जहां पत्थरबाजी और आगजनी ने माहौल खराब किया, वहीं जबलपुर में भी तनाव की स्थिति बनी रही। इन घटनाओं ने न केवल स्थानीय प्रशासन की चुनौतियों को बढ़ा दिया है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने पर भी चोट की है। गनीमत रही कि हैदराबाद में पुलिस ने समय रहते मोर्चा संभाल लिया, जिससे वहां किसी बड़ी अनहोनी को टालने में सफलता मिली।
बागलकोट में जुलूस के दौरान पथराव और पुलिस पर हमला
कर्नाटक के बागलकोट जिले में छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर निकाला गया जुलूस हिंसा की भेंट चढ़ गया। अंबाभवानी मंदिर से शुरू हुआ यह सांस्कृतिक मार्च जब पंका मस्जिद के करीब पहुंचा, तो वहां नमाज का समय होने और डीजे की आवाज को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि इसी दौरान अचानक मस्जिद की दिशा से जुलूस पर चप्पलें और पत्थर फेंके गए। इस हमले में जिले के पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ गोयल स्वयं घायल हो गए। उनकी गर्दन पर चोट के निशान और खून के धब्बे सुरक्षा व्यवस्था में आई सेंध की गवाही दे रहे थे। एसपी के साथ-साथ कई अन्य पुलिसकर्मी और नागरिक भी इस हमले की चपेट में आए।
हिंसा के बाद आगजनी और प्रशासन की जवाबी कार्रवाई
पथराव की घटना के बाद गुस्साए कुछ कार्यकर्ताओं ने मस्जिद के पास स्थित व्यावसायिक ठेलों में आग लगा दी, जिससे क्षेत्र में धुएं का गुबार और अफरा-तफरी फैल गई। स्थिति को नियंत्रण से बाहर जाते देख पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया और उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए बल प्रयोग किया। रात के करीब 11 बजे तक कड़ी मशक्कत के बाद हालात पर काबू पाया जा सका। दमकल की गाड़ियों ने समय रहते आग बुझाई ताकि रिहायशी इलाकों तक लपटें न पहुंचें। वर्तमान में पूरे बागलकोट में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है और संदिग्ध इलाकों में फ्लैग मार्च निकाला जा रहा है ताकि शांति बहाल रहे।
दोषियों की पहचान और कानून व्यवस्था की कड़ी चुनौती
घटना के बाद बागलकोट पुलिस और प्रशासन अब दोषियों की धरपकड़ में जुट गया है। सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो का सहारा लेकर उन शरारती तत्वों की पहचान की जा रही है जिन्होंने पत्थरबाजी शुरू की थी। आयोजकों ने इस हमले को सुनियोजित बताते हुए प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। संवेदनशील क्षेत्रों में इंटरनेट और ड्रोन कैमरों के जरिए निगरानी रखी जा रही है ताकि अफवाहों को फैलने से रोका जा सके और शांति व्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाया जा सके।
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