उत्तराखंड की सर्द रातों और तपती धूप में सड़कों पर डटे रहने वाले होमगार्ड जवानों की उम्मीदों पर उन्हीं के महकमे के अफसरों ने पानी फेर दिया। मामला वर्दी खरीद में हुए उस भारी-भरकम घपले का है, जिसने शासन की साख को बट्टे खाते में डाल दिया है। सरकारी फाइलों के भीतर छिपे इस सच ने सबको झकझोर दिया है कि जो वर्दी महज एक करोड़ रुपये में मिल सकती थी, उसके लिए सरकारी खजाने से तीन करोड़ रुपये लुटा दिए गए। यह लूट कोई अनजाने में हुई चूक नहीं थी, बल्कि बड़ी चालाकी से बुना गया एक ऐसा जाल था जिसमें जवानों की जरूरत को भ्रष्टाचार का जरिया बनाया गया। ताज्जुब की बात यह है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में इस खेल को अंजाम देने के बाद, अगले साल भी इसी ऊंचे रेट पर लूट की बिसात बिछा दी गई थी।
नए डीजी की ईमानदारी से खुला राज
इस पूरे काले धंधे की परतें तब खुलीं जब विभाग की कमान नए महानिदेशक पीवीके प्रसाद ने संभाली। कुर्सी संभालते ही जब उन्होंने पुरानी फाइलों का ऑडिट कराया, तो भ्रष्टाचार की सड़ांध बाहर आने लगी। डीजी प्रसाद ने पाया कि पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया की धज्जियां उड़ाते हुए चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुँचाने के लिए बाजार भाव से कई गुना अधिक कीमत पर वर्दी खरीदी गई। उन्होंने बिना किसी दबाव के अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी, जिसमें डिप्टी कमांडेंट जनरल अमिताभ श्रीवास्तव को इस घोटाले का मुख्य विलेन करार दिया गया। डीजी की सिफारिश बेहद सख्त थी, जिसमें न केवल आरोपी को बर्खास्त करने और जेल भेजने की बात कही गई, बल्कि लूटी गई पाई-पाई की रिकवरी करने पर भी जोर दिया गया।
जीरो टॉलरेंस का वार और महकमे में खलबली
जैसे ही यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मेज पर पहुँची, उन्होंने बिना वक्त गंवाए कड़ी कार्रवाई के निर्देश दे दिए। भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' का नारा देने वाली धामी सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि वर्दी जैसी बुनियादी जरूरत में घोटाला करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। सीएम के आदेश पर संबंधित अधिकारी को तत्काल सस्पेंड कर दिया गया और एक उच्च स्तरीय संयुक्त जांच समिति का गठन कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद से होमगार्ड निदेशालय से लेकर शासन के गलियारों तक हड़कंप मचा हुआ है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस दो करोड़ के खेल में कुछ और बड़े चेहरे भी पर्दे के पीछे से डोर खींच रहे थे? जांच की आंच जैसे-जैसे बढ़ेगी, कई और सफ़ेदपोशों की नींद उड़ना तय माना जा रहा है।
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