काशीपुर नगर निगम सभागार में शुक्रवार की दोपहर सियासी पारा उस वक्त चढ़ गया जब महापौर दीपक बाली ने एक प्रेसवार्ता के दौरान अपनी ही पार्टी के कद्दावर विधायक अरविंद पांडेय के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया। बाली ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विकास रथ को रोकने के लिए पार्टी के भीतर ही एक गिरोह सक्रिय है जो लगातार साजिशें रच रहा है। उन्होंने शेरों-शायरी का सहारा लेते हुए विधायक पर हमला बोला और कहा कि जिस घर से आबोदाना मिल रहा है, उसी को जलाकर तापने की कोशिश की जा रही है। महापौर ने साफ तौर पर चुनौती देते हुए कहा कि अगर मंशा साफ है तो खुलकर सामने आकर कहें कि वे पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री के तौर पर स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।

खटीमा की हार से लेकर अंकिता हत्याकांड तक साजिश का आरोप

दीपक बाली ने पुरानी कड़वाहटों को कुरेदते हुए बड़ा दावा किया कि मुख्यमंत्री धामी खटीमा से चुनाव हारे नहीं थे, बल्कि उन्हें एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत हराया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि हार के बावजूद जब केंद्रीय नेतृत्व ने धामी की कार्यशैली पर भरोसा जताया और उन्हें दोबारा कमान सौंपी, तो विरोधियों में तिलमिलाहट बढ़ गई। बाली ने अंकिता भंडारी हत्याकांड का जिक्र करते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ लोग कांग्रेस के सुर में सुर मिलाकर सरकार को घेरने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिन में अठारह-अठारह घंटे काम करने वाले मुख्यमंत्री को रोकने के लिए जिस तरह का जाल बुना जा रहा है, वह किसी विपक्षी दल की रणनीति जैसा प्रतीत होता है।

महाभारत के धृतराष्ट्र से तुलना और बलराज पासी को नसीहत

महापौर के हमले यहीं नहीं रुके, उन्होंने इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की तुलना महाभारत काल से कर दी। उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेता बलराज पासी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उन्हें धृतराष्ट्र की संज्ञा दी। बाली ने कहा कि पासी जी एक सम्मानित स्तंभ हैं, लेकिन पुत्रमोह में गलत कार्यों को चुपचाप देखना उन्हें भी इस षड्यंत्र का हिस्सा बना रहा है। गदरपुर में आयोजित कार्यक्रमों का उदाहरण देते हुए बाली ने कहा कि पासी का वहां न होना दर्शाता है कि वे भी कहीं न कहीं इन कृत्यों से सहमत नहीं हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि उन्हें धृतराष्ट्र की भूमिका त्याग कर सार्वजनिक रूप से स्टैंड लेना होगा।

पार्टी अनुशासन और मुख्यमंत्री की साख का सवाल

बाली ने अंत में स्पष्ट किया कि यह लड़ाई केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि मुख्यमंत्री की साख और उत्तराखंड के विकास की है। उन्होंने कहा कि जो लोग कम उम्र के व्यक्ति के नेतृत्व को पचा नहीं पा रहे हैं, वे पार्टी की मजबूती के बजाय उसे कमजोर करने में जुटे हैं। विधायक अरविंद पांडेय पर सीधा निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को कमजोर करने की हर कोशिश का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। इस प्रेसवार्ता ने उत्तराखंड भाजपा के भीतर चल रही गुटबाजी को एक बार फिर सरेआम कर दिया है, जिससे आने वाले दिनों में संगठन के भीतर बड़े फेरबदल या अनुशासनात्मक कार्रवाई की आहट सुनाई देने लगी है।


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