देवभूमि की सड़कों पर अब यातायात नियमों को ताक पर रखकर चलना वाहन स्वामियों को भारी पड़ने वाला है। राज्य सरकार ने परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और सख्त बनाने के लिए ई-डिटेक्शन प्रणाली का बिगुल फूंक दिया है। सोमवार से प्रदेश के सात प्रमुख टोल प्लाजा पर यह नई व्यवस्था सक्रिय हो जाएगी। अब जैसे ही कोई वाहन टोल प्लाजा की लेन में प्रवेश करेगा और उसका फास्टैग स्कैन होगा, वैसे ही सिस्टम उस वाहन की पूरी कुंडली खंगाल लेगा। यह कदम न केवल राजस्व की चोरी रोकने के लिए है बल्कि सड़कों पर दौड़ रहे उन अनफिट वाहनों पर लगाम लगाने के लिए भी है जो आए दिन हादसों का सबब बनते हैं।

सड़क परिवहन मंत्रालय के डेटाबेस से सीधी निगरानी

​परिवहन विभाग ने इस तकनीक को एनआईसी के सहयोग से राष्ट्रीय डेटाबेस 'वाहन' पोर्टल से सीधे जोड़ दिया है। टोल प्लाजा के कैमरों और सेंसर का तालमेल इतना सटीक होगा कि पलक झपकते ही वाहन के पंजीकरण नंबर के आधार पर उसके परमिट, फिटनेस, बीमा और प्रदूषण प्रमाण पत्र की जांच हो जाएगी। यदि इनमें से कोई भी दस्तावेज अधूरा या एक्सपायर पाया गया, तो ई-डिटेक्शन सॉफ्टवेयर बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के तुरंत चालान जनरेट कर देगा। परिवहन उपायुक्त शैलेश तिवारी के अनुसार उत्तराखंड देश का ऐसा पांचवां राज्य बन गया है जिसने तकनीक के माध्यम से नियमों के उल्लंघन को रोकने की यह पहल की है।

चालान का नया दौर और पंद्रह साल पुराने वाहनों पर नजर


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​इस नई व्यवस्था के तहत सबसे पहले उन वाहनों को निशाना बनाया जाएगा जो पंद्रह साल की समय सीमा पार कर चुके हैं और जिनका पंजीकरण अब वैध नहीं है। पहले चरण में विभाग ने परमिट, बीमा और फिटनेस को प्राथमिकता दी है, लेकिन आने वाले समय में प्रदूषण और रोड टैक्स जैसे अन्य दस्तावेजों को भी इसी दायरे में लाया जाएगा। वाहन स्वामी के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एसएमएस के जरिए चालान की राशि और उल्लंघन का विवरण भेजा जाएगा, जिसमें भुगतान के लिए डिजिटल लिंक भी मौजूद होगा। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी।

चिह्नित टोल प्लाजा और सुरक्षा का घेरा

​यह व्यवस्था फिलहाल हरिद्वार के बहादराबाद और भगवानपुर, देहरादून के लच्छीवाला, और ऊधमसिंहनगर के जगतापुर पट्टी, बनुषी, नगला व देवरिया टोल प्लाजा पर प्रभावी होगी। इन स्थानों पर कैमरों को इस तरह अपग्रेड किया गया है कि वे तेज रफ्तार में भी सटीक नंबर प्लेट पहचान सकें। विभाग का मानना है कि इस डिजिटल सख्ती से वाहन स्वामी समय पर अपने कागजात पूरे रखने के लिए प्रेरित होंगे, जिससे सड़क सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। अब उत्तराखंड के टोल प्लाजा सिर्फ टोल वसूली का केंद्र नहीं, बल्कि यातायात नियमों के फिल्टर के रूप में काम करेंगे।

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