सुखवंत सिंह प्रकरण की गुत्थी सुलझाने के लिए गठित विशेष जांच टीम के अध्यक्ष और आईजी एसटीएफ नीलेश आनंद भरणें सोमवार को पूरी ताकत के साथ काठगोदाम पहुंचे। उन्होंने अपनी टीम के साथ उस घटनास्थल का कोना-कोना खंगाला जहां मौत का यह तांडव हुआ था। जांच की संवेदनशीलता को देखते हुए एफएसएल की टीम ने वैज्ञानिक पद्धतियों के माध्यम से मौके से उन तमाम बारीकियों को संकलित किया जो इस केस की दिशा और दशा तय करेंगे। भरणें ने साफ कर दिया है कि यह केवल एक औपचारिक जांच नहीं है बल्कि तथ्यों और साक्ष्यों की वह कसौटी है जिस पर हर दोषी को नपना होगा। जांच की साफ-सुथरी छवि और पारदर्शिता को लेकर आईजी बेहद सख्त नजर आए और उन्होंने स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया को अपनी सीधी निगरानी में शुरू करवा दिया है।

अभिलेखों की सुरक्षा और स्थानीय पुलिस पर कड़ा अंकुश

इस हाई-प्रोफाइल मामले में किसी भी प्रकार की सेंधमारी या प्रभाव को रोकने के लिए एसआईटी प्रमुख ने कड़े सुरक्षात्मक कदम उठाए हैं। ऊधमसिंहनगर पुलिस कार्यालय से लेकर थाना आईटीआई और चौकी पैगा तक फैले हुए तमाम दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स को तत्काल प्रभाव से सुरक्षित करने के आदेश दिए गए हैं। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि सिस्टम के भीतर बैठा कोई भी व्यक्ति सबूतों के साथ किसी भी तरह की हेराफेरी करने की हिम्मत न जुटा सके। सबसे महत्वपूर्ण निर्देश स्थानीय पुलिस के लिए जारी किया गया है जिसमें उन्हें पीड़ित परिवार या किसी भी गवाह से संपर्क करने से पूरी तरह रोक दिया गया है। केस की सच्चाई और सबूतों के असली स्वरूप को सुरक्षित रखने के लिए स्थानीय पुलिस की भूमिका को जांच से पूरी तरह दूर रखा गया है ताकि गवाह बिना किसी दबाव या डर के सच सामने रख सकें।

सुरक्षा का घेरा और तकनीकी विशेषज्ञों की विशेष फौज

शिकायतकर्ता और पीड़ित परिवार की सुरक्षा को लेकर शासन और प्रशासन किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है। इसीलिए पीड़ित परिवार के आवास पर स्थानीय पुलिस के बजाय अन्य जनपदों से मंगाई गई विशेष पुलिस गार्द तैनात की जा रही है। वहीं इस केस की तकनीकी जटिलताओं को सुलझाने के लिए आईजी भरणें ने छह विशेष पुलिसकर्मियों की एक टोली को जांच का हिस्सा बनाया है। इस टीम में उप निरीक्षक हेमंत कठैत, सोनू सिंह, राधिका भंडारी समेत हेड कांस्टेबल विनोद यादव, कमल कुमार और सर्विलांस सेल के गिरीश भट्ट शामिल हैं। यह टीम कॉल डिटेल्स, डिजिटल फुटप्रिंट्स और अन्य तकनीकी सबूतों के जरिए मौत की असल वजहों तक पहुंचने का प्रयास करेगी।

एफआईआर का ट्रांसफर और न्याय का पक्का भरोसा

देर शाम जब एसआईटी टीम ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की तो माहौल बेहद भावुक था लेकिन आईजी नीलेश आनंद भरणें के शब्दों ने परिवार को वह हिम्मत दी जिसकी उन्हें सख्त जरूरत थी। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि यह मामला उनके लिए अत्यंत संवेदनशील है और इसमें कानून के हर नियम का कड़ाई से पालन किया जाएगा। विवेचना को अधिक असरदार और निष्पक्ष बनाने के लिए थाना आईटीआई में दर्ज मूल एफआईआर को अब थाना काठगोदाम शिफ्ट कर दिया गया है। यह प्रशासनिक बदलाव इसलिए किया गया है ताकि जांच का केंद्र बदल सके और विवेचना में किसी भी प्रकार का स्थानीय प्रभाव आड़े न आए। आईजी ने दोहराया कि सबूतों के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और सच्चाई को किसी भी कीमत पर दबने नहीं दिया जाएगा।


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