ऊधमसिंह नगर जनपद में कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा के दावों की कलई एक बार फिर खुल गई है। जिसे आम नागरिक सबसे सुरक्षित और अति-संवेदनशील इलाका मानते हैं, उसी पुलिस लाइन पंतनगर के भीतर एक नाबालिग बेटी के साथ हुई छेड़छाड़ की घटना ने पूरे महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। रुद्रपुर की कौशल्या एन्क्लेव निवासी एक महिला की पुत्री शुक्रवार को अभ्यास के लिए मनोज सरकार स्टेडियम जा रही थी। जैसे ही वह परेड ग्राउंड के पास पहुंची, नशे में धुत एक पुलिस सिपाही ने उसकी राह रोक ली। रक्षक की वर्दी पहने उस शख्स ने नाबालिग का हाथ पकड़कर उसे जबरन खींचने की कोशिश की और उसके साथ घिनौनी व अशोभनीय हरकतें कीं। पुलिस लाइन जैसे अनुशासित परिसर में इस तरह की वारदात होना न केवल आश्चर्यजनक है, बल्कि यह जिले में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे तमाम दावों पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।

अपराधी बेखौफ और पुलिस की कार्यप्रणाली सुस्त

​इस भयावह स्थिति से जूझती पीड़िता किसी तरह अपनी जान और गरिमा बचाकर वहां से भागने में सफल रही। उसने स्टेडियम पहुंचकर अपने साथियों को सूचित किया और शाम करीब पांच बजे अपनी मां को आपबीती सुनाई। सूचना मिलते ही परिजन तत्काल पुलिस लाइन पहुंचे, लेकिन वहां का नजारा बेहद हताश करने वाला था। जिस परिसर में पुलिस की चौबीस घंटे मौजूदगी रहती है, वहां आरोपी सिपाही को परिजनों के सामने लाने में महकमे को लगभग दो घंटे का समय लग गया। पुलिस की यह लेटलतीफी उनकी तत्परता और संवेदनशीलता की पोल खोलती है। जब विभाग अपने ही घर में हुई वारदात पर तत्काल एक्शन लेने में असमर्थ दिखाई दे रहा है, तो आम जनता सड़कों और बाजारों में खुद को सुरक्षित कैसे महसूस कर सकती है। यह देरी इस आशंका को भी जन्म देती है कि क्या महकमा अपने ही बीच के अपराधी को बचाने या मामले को ठंडा करने की कोशिश कर रहा था।

मिशन शक्ति के दावों और जमीनी हकीकत का अंतर


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​यह घटना ऐसे वक्त में हुई है जब उधम सिंह नगर पुलिस 'मिशन शक्ति' और 'महिला सुरक्षा अभियान' जैसे भारी-भरकम शब्दों के साथ अखबारों और सोशल मीडिया पर अपनी पीठ थपथपा रही है। विडंबना देखिए कि एक तरफ बड़े-बड़े पोस्टर और प्रेस विज्ञप्तियां जारी होती हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस की नाक के नीचे ही बेटियां असुरक्षित हैं। यदि इस मामले में आरोपी कोई सामान्य नागरिक होता, तो शायद पुलिस की सक्रियता अलग स्तर पर होती, लेकिन खाकी की संलिप्तता ने कार्रवाई की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। पीड़िता की माता ने अब भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं में मुकदमे की मांग करते हुए लापरवाह अधिकारियों पर भी गाज गिराने की अपील की है। फिलहाल, इस कांड ने पुलिस की साख को गहरा धक्का पहुंचाया है। अब यह देखना शेष है कि जिले के आला अधिकारी इस मामले में न्याय करते हैं या फिर यह प्रकरण भी पुरानी फाइलों के ढेर में कहीं गुम होकर रह जाएगा।

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