उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले का हृदय कहे जाने वाले रुद्रपुर शहर में कानून व्यवस्था उस समय पूरी तरह चरमरा गई जब बेखौफ बदमाशों ने सरेराह एक जनप्रतिनिधि को अपना निशाना बनाया। पूर्व कैबिनेट मंत्री और किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ के पुत्र व कांग्रेस पार्षद सौरभ बेहड़ पर हुए जानलेवा हमले ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। यह घटना शहर की सबसे व्यस्त और पॉश कॉलोनी मानी जाने वाली आवास विकास में एलआईसी बिल्डिंग के समीप घटित हुई। जानकारी के अनुसार, सौरभ बेहड़ अपनी स्कूटी से जा रहे थे, तभी तीन नकाबपोश हमलावरों ने पहले उनकी स्कूटी में जोरदार टक्कर मारकर उन्हें सड़क पर गिरा दिया और फिर हॉकी व डंडों से उन पर ताबड़तोड़ प्रहार शुरू कर दिए। हमलावरों ने उनके सिर और शरीर के अन्य संवेदनशील हिस्सों पर इतनी बेरहमी से वार किए कि वह मौके पर ही लहूलुहान होकर अचेत हो गए।
सोची-समझी साजिश और पंचायत का बहाना
इस हमले के पीछे की कड़ियाँ पिछले कुछ दिनों से चल रहे राजनीतिक घटनाक्रमों से जुड़ी नजर आती हैं। हाल ही में आवास विकास चौकी पर सत्ता पक्ष और विपक्षी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी तकरार हुई थी। बताया जा रहा है कि इसी विवाद के निपटारे के लिए आवास विकास चौकी इंचार्ज ने पार्षद सौरभ बेहड़ को फोन कर पंचायत के लिए बुलाया था। जब सौरभ अपने घर से महज सौ मीटर की दूरी पर पहुंचे, तभी घात लगाकर बैठे हमलावरों ने उन पर हमला बोल दिया। इस क्रूरता को देखकर स्थानीय लोगों का मानना है कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। जिस तरह से पंचायत के नाम पर बुलाकर रास्ते में घेरकर हमला किया गया, वह पुलिस की भूमिका और सूचनाओं की गोपनीयता पर भी संदेह पैदा करता है।
अस्पताल में आक्रोश और तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया
गंभीर रूप से घायल सौरभ बेहड़ को तत्काल नगर के फुटेला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें आईसीयू में रखा गया है। अपने बेटे की हालत देखकर विधायक तिलक राज बेहड़ का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द ही अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो वह स्वयं न्याय करने को मजबूर होंगे। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि पुलिस की शिथिलता के कारण ही अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। वहीं, पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल और व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा ने भी अस्पताल पहुंचकर इस घटना की कड़ी निंदा की। विपक्षी नेताओं का स्पष्ट आरोप है कि सत्ता के संरक्षण में विपक्ष की आवाज दबाने के लिए हिंसा का सहारा लिया जा रहा है।
सत्ता पक्ष का रुख और पुलिस प्रशासन की कार्रवाई
घटना की गंभीरता को देखते हुए भाजपा विधायक शिव अरोरा भी अस्पताल पहुंचे और सौरभ बेहड़ की कुशलता जानी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन किसी के परिवार पर इस तरह का हमला कतई स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने एसएसपी से वार्ता कर दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई का आश्वासन दिया है। दर्जा राज्यमंत्री उत्तम दत्ता व महापौर विकास शर्मा ने भी अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और घायल पार्षद का काल जाना। दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन अब पूरी तरह बैकफुट पर है। कोतवाली प्रभारी मोहन चंद पांडेय के नेतृत्व में पुलिस की टीमें सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही हैं। क्षेत्राधिकारी प्रशांत कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह हमला पुरानी क्रॉस एफआईआर और आपसी रंजिश का परिणाम लग रहा है। उन्होंने कड़ी चेतावनी दी है कि शहर की शांति भंग करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
गिरता राजनीतिक स्तर और सुरक्षा पर उठते सवाल
यह घटना केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं है, बल्कि रुद्रपुर की राजनीति में घर कर चुकी व्यक्तिगत रंजिश और हिंसा के बढ़ते प्रभाव का प्रतीक है। जब एक विधायक का पुत्र और वर्तमान पार्षद ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता के मन में असुरक्षा का भाव पैदा होना स्वाभाविक है। व्यस्त इलाके में सरेराह हुई इस वारदात ने यह साबित कर दिया है कि अपराधियों के मन से कानून का खौफ खत्म हो चुका है। अब देखना यह होगा कि पुलिस प्रशासन इन नकाबपोश हमलावरों को कितनी जल्दी सलाखों के पीछे भेजता है और शहर में फिर से विश्वास का वातावरण स्थापित कर पाता है या नहीं।
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