पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव अब खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, जिसके चलते अमेरिका ने मध्य पूर्व के करीब दस देशों में मौजूद अपने नागरिकों के लिए गंभीर सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। शनिवार को बहरीन, इराक, इजरायल, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई स्थित अमेरिकी दूतावासों ने नागरिकों को तत्काल क्षेत्र छोड़ने पर विचार करने अथवा किसी भी वक्त निकलने के लिए तैयार रहने की सलाह दी।
एडवाइजरी में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ईरान और उसके समर्थक संगठन दुनिया भर में अमेरिकी ठिकानों, राजनयिक परिसरों और वाणिज्यिक संस्थानों को निशाना बना सकते हैं। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए उड़ानें रद्द होने, वायु क्षेत्र बंद होने और यात्रा बाधित होने की आशंका जताई गई है, जिसके चलते जॉर्डन में सैन्य ठिकानों से दूर रहने और इजरायल में बम शेल्टरों के निकट रहने की हिदायत दी गई है।
यह एडवाइजरी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस सख्त चेतावनी के बाद आई है जिसमें उन्होंने ईरान पर लगातार हमले जारी रखने की बात कही थी। हालांकि इसके जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए पूरे पश्चिम एशिया के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को पंगु बनाने की योजना सामने रखी है। ईरानी सरकारी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, यदि अमेरिका या इजरायल ने ईरानी ऊर्जा ठिकानों पर कोई नया हमला किया, तो तेहरान पूरे क्षेत्र के महत्वपूर्ण तेल और गैस क्षेत्रों को निशाना बनाएगा। ईरान के इस संभावित निशाने पर सऊदी अरब का घावर तेल क्षेत्र, यूएई की रुवैस रिफाइनरी, कुवैत का बुर्गन क्षेत्र और कतर का विशाल नॉर्थ फील्ड शामिल हैं।
तनाव का मुख्य केंद्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य बना हुआ है, जहां वाणिज्यिक नौवहन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और लगातार मिसाइल तथा ड्रोन हमले जारी हैं। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ईरान पर अपनी शर्तें मानने और संघर्ष विराम वार्ता के लिए दबाव बनाने के इरादे से बुनियादी ढांचों पर और हमले करने पर विचार कर रहा है। दूसरी ओर, तेहरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका का समर्थन करने वाला कोई भी देश इस युद्ध की लपटों से अछूता नहीं रहेगा। दोनों पक्षों के इस कड़े और बेचीदा रुख ने पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय और वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरे संकट में डाल दिया है।
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