- SIR में लापरवाही: CEO की कड़े रुख
- अत्यधिक सुस्त गति पर गहरी नाराजगी
- CEO ने लगभग 30 जिलों को फटकार
लखनऊ: मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) कार्य में अत्यधिक सुस्त गति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। गुरुवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में, CEO ने लगभग 30 जिलों को फटकार लगाई है, जिनमें गोंडा, शामली, महोबा और अयोध्या जैसे जिले शामिल थे। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को काम में तत्काल तेजी लाने और SIR के लक्ष्य को समय पर पूरा करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। SIR के इस महत्वपूर्ण कार्य में लापरवाही बरतने पर CEO ने बैठक में बिना सूचना अनुपस्थित रहने पर शामली के डीएम अरविंद कुमार चौहान को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।

सीईओ ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि बीते दो दिनों में गणना प्रपत्र के वितरण की प्रगति संतोषजनक नहीं है। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे व्यक्तिगत रूप से इस प्रक्रिया की निगरानी करें, क्योंकि SIR भारत निर्वाचन आयोग की प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि राजनैतिक दलों से संपर्क करके बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) की तैनाती शीघ्र की जाए, ताकि पुनरीक्षण कार्य में पारदर्शिता बनी रहे।
SIR: BLO ऐप पर ऑनलाइन ट्रैकिंग अनिवार्य
SIR की प्रगति को पारदर्शी और त्वरित बनाने के लिए CEO ने सख्त तकनीकी निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सभी डीएम को सुनिश्चित करने को कहा कि:
- एडवांस ऐप वर्जन: सभी बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) अपने स्मार्टफोन पर BLO ऐप का एडवांस वर्जन 8.7 प्ले स्टोर से डाउनलोड और अपलोड करें।
- दैनिक ऑनलाइन रिपोर्टिंग: जिन मतदाताओं को गणना प्रपत्र वितरित किए जा रहे हैं, उनका ब्यौरा BLO ऐप पर हर दिन ऑनलाइन अपडेट किया जाए। यह सुनिश्चित करता है कि प्रदेश स्तर पर CEO कार्यालय को SIR की सटीक दैनिक प्रगति मिल सके।
- दस्तावेज़ और हस्ताक्षर नियम: गणना प्रपत्र पर परिवार का कोई भी सदस्य हस्ताक्षर कर सकता है। BLO 4 दिसंबर तक घर-घर जाएंगे।
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SIR: DCC, 'बुक-ए-कॉल' और 2003 की सूची का समायोजन
CEO नवदीप रिणवा ने SIR से संबंधित शिकायतों के त्वरित निवारण और पुराने रिकॉर्ड्स के समायोजन के लिए भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं:
- जिला संपर्क केंद्र (DCC): राष्ट्रीय संपर्क केंद्र (NCC) की तर्ज पर हर जिले में जिला संपर्क केंद्र (DCC) बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
- 'बुक-अ-कॉल' सुविधा: CEO ने वोटर्स.ईसीआई.जीओवी.इन पर उपलब्ध 'बुक-अ-कॉल' सुविधा का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा।
- 2003 की मैपिंग पर जोर: वर्ष 2003 की मतदाता सूची में जिन मतदाताओं के नाम हैं, उनका नाम नई सूची में जोड़ने के लिए मैपिंग का काम तीन दिनों के भीतर पूरा करने का आदेश दिया गया है।
SIR: कठोर कार्रवाई की चेतावनी और अंतिम चरण
SIR के तहत CEO ने एक समय-सीमा तय की है और लापरवाही न बरतने की कड़ी चेतावनी दी है:
- कठोर चेतावनी: CEO ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह इस कार्य में लापरवाही न बरतें वरना कठोर कार्रवाई की जाएगी।
- नौ दिसंबर के बाद नोटिस: नौ दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होगी। ऐसे मतदाता जिनका नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नहीं है, उन्हें नौ दिसंबर के बाद निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी की ओर से नोटिस दिया जाएगा। उन्हें 13 मान्य दस्तावेजों में से कोई एक प्रस्तुत करने पर मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा।
क्या है SIR?
SIR (Special Intensive Revision) का पूर्ण रूप विशेष सघन पुनरीक्षण है। यह भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूची को त्रुटिरहित और 100% सटीक बनाने के लिए चलाया गया एक व्यापक और गहन अभियान है। SIR, मतदाता सूची के सामान्य वार्षिक पुनरीक्षण (SSR) से अलग है, क्योंकि जहाँ SSR में केवल बदलाव किए जाते हैं, वहीं SIR में प्रक्रिया बहुत विस्तृत होती है। इस प्रक्रिया के तहत, बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) प्रत्येक घर जाकर हर एक मतदाता का विवरण भौतिक रूप से सत्यापित करते हैं।
इसमें पहले से पंजीकृत सभी मतदाताओं को भी एक नया गणना प्रपत्र (Enumeration Form) भरना होता है। SIR का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची से मृत, स्थानांतरित, या डुप्लीकेट नामों को हटाना है, और यह सुनिश्चित करना है कि जो नागरिक वोट देने के पात्र (18 वर्ष पूर्ण कर चुके) हैं, उनका नाम सूची में अवश्य जोड़ा जाए।
SIR की यह गहन प्रक्रिया मतदाता सूची में मौजूद सभी प्रकार की विसंगतियों को दूर कर, सूची को स्वच्छ और सटीक बनाती है। यह 'एक व्यक्ति, एक वोट' के सिद्धांत को मजबूत करता है, जिससे फ़र्ज़ी वोटिंग की संभावना कम होती है और लोकतंत्र में जनता का विश्वास दृढ़ होता है। यह एक बड़ी प्रक्रिया है जिसे अक्सर 20-22 साल के अंतराल पर शुरू किया जाता है, ताकि मतदाता सूची को बिल्कुल नए सिरे से तैयार किया जा सके।
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